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कोरोना का कहर: अमेरिका की 20 से ज्यादा कम्पनियां दिवालिया, मुरादाबाद के निर्यातकों के एक हजार करोड़ से अधिक डूबे

Highlights -कोरोना के चलते ज्यादातर देशों की अर्थ व्यवस्था हुई है प्रभावित -अमेरिका की बड़ी कम्पनियों ने किया है दिवालिया घोषित -स्थानीय निर्यातकों के साथ होता है एक हजार करोड़ से अधिक का कारोबार

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मुरादाबाद: कोरोना महामारी की चपेट में न सिर्फ इंसान हैं बल्कि इसने पूरी दुनिया की अर्थ व्यवस्था को भी चौपट कर दिया है। जिसका असर अब दिखने लगा है। कोरोना संकट के चलते अमेरिका की बीस बड़ी कम्पनियों ने अपने आपको दिवालिया घोषित कर दिया है, जिसके बाद से स्थानीय निर्यातकों के होश उड़ गए हैं। क्यूंकि अकेले पियर वन जैसी कम्पनी ही मुरादाबाद के निर्यातकों के साथ 150 करोड़ का कारोबार करती है। अब इन निर्यातकों ने सरकार से मदद की उम्मीद लगाई है।

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ये कम्पनियां हुईं दिवालिया
ईपीसीएच के पूर्व चेयरमैन सतपाल में मुताबिक अमेरिका की पियर वन, विक्टोरियाज सीक्रेट,बाथ एंड बेबी वर्क्स एट होम, जे क्रीव,एन टेलर, पार्टी सिटी,के मार्ट समेत बीस से ज्यादा कम्पनियों ने खुद को पांच मई को दिवालिया घोषित कर दिया है। इसका सीधा असर मुरादाबाद के पीतल निर्यात पर पड़ेगा। ये कम्पनियां करीब मुरादाबाद से एक हजार करोड़ से अधिक का कारोबार करतीं हैं। इसके साथ ही अमेरिका में 150 से ज्यादा डिपार्टमेंटल स्टोर चलाने वाली जेसी पैनी और कैलीफोर्निया की नम्बर वन कम्पनी नीमन मार्क्स ने भी अपने आपको दिवालिया घोषित कर लिया है। इन कंपनियों से कारोबार होने के कारण बड़ी रकम डूबने की आशंका है।

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सिर्फ बीमा की रकम मिलेगी
सतपाल के मुताबिक निर्यातकों को उतनी ही रकम मिल सकेगी जितना एक्सपोर्ट बीमा है। बाकी रकम डूब जाएगी। पीतल कारोबार पहले से ही मंदी की चपेट में था। इस साल शुरुआत से कोरोना के चलते दुनिया भर के ट्रेड फेयर कैंसिल हो गए। जिस कारण आर्डर भी नहीं मिले, यही नहीं स्थानीय स्तर पर भी जो बाजार था वो भी डूबा समझो। इसलिए सरकार को निर्यातकों की मदद करनी चाहिए।

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लॉक डाउन ने बिगाड़े हालात
यहां बता दें कि कोरोना के चलते अमेरिका समेत यूरोप और दुनिया के ज्यादातर बड़े देशों में लॉक डाउन है, जिस कारण व्यापारिक गतिविधियाँ थम गयीं हैं। मुरादाबाद में ज्यादातर ब्रास आइटम अमेरिका और यूरोप ही जाते हैं, ऐसे में अब स्थानीय निर्यातकों की बड़ी रकम डूबने की आशंका बढ़ गयी है। अब इससे सरकार और बाजार किस तरह की राहत देता है ये अभी तय नहीं है।


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