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भाजपा ने मुरादाबाद में फिर खेला इस चेहरे पर दांव- बनाया मेयर प्रत्याशी, अन्य दावेदार पस्त

अगस्त 2016 के उपचुनाव में विनोद अग्रवाल मेयर बने थे। इससे पहले इनकी पत्नी स्वर्गीय बीना अग्रवाल जुलाई 2012 में मेयर चुनी गईं थी।

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vinod agarwal

मुरादाबाद। निकाय चुनावों की तेज होती सरगर्मियों के बीच आखिर रविवार शाम को भाजपा ने भी मेयर प्रत्याशी का ऐलान कर दिया। पार्टी पूर्व मेयर बीना अग्रवाल के पति और निवर्तमान मेयर विनोद अग्रवाल पर ही फिर भरोसा जताया है।

आपको बता दें कि अगस्त 2016 के उपचुनाव में विनोद अग्रवाल मेयर बने थे। इससे पहले इनकी पत्नी स्वर्गीय बीना अग्रवाल जुलाई 2012 में मेयर चुनी गईं थी। लेकिन मई 2016 में उनका आकस्मिक निधन हो गया था। जिसके बाद उपचुनाव में विनोद अग्रवाल को भाजपा ने मैदान में उतारा था। तब उन्होंने सपा उम्मीदवार राजकुमार प्रजापति को 35 हजार से अधिक वोटों से हराया था।

उपचुनाव में कुल 5,54,116 मतदाताओं में से 1,36,090 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। 35 राउंड तक चली मतगणना में भाजपा प्रत्याशी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा था। उन्हें कुल 66535 मत मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे राजकुमार प्रजापति को 30720 मतों से संतोष करना पड़ा। तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी कैसर अली कुद्दूसी को 18750 और चौथे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी आनंद मोहन गुप्ता को सिर्फ 4830 वोट ही मिल पाए।

लेकिन इस बार टिकट के लिए उन्हें एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा। क्योंकि स्थानीय भाजपा इकाई उन्हें टिकट के देने के पक्ष में नहीं थी। लेकिन लोकप्रिय चेहरा होने के कारण पार्टी हाईकमान ने एक बार फिर उन्हें उम्मीदवार बनाया है। गौरतलब है कि शहर में सपा से हाजी यूसुफ अंसारी मैदान में हैं तो कांग्रेस ने सपा जिला अध्यक्ष हाजी इकराम कुरैशी के सगे भतीजे रिजवान कुरैशी को टिकट दिया है। कांग्रेस और सपा द्वारा मुस्लिम प्रत्याशी होने से अगर मुस्लिम वोटों का बंटवारा हुआ तो भाजपा की राह आसान हो सकती है।

टिकट के लिए विनोद अग्रवाल को पार्टी नेताओं व हाईकमान से संबंधों के अलावा सांसद सर्वेश सिंह का भी समर्थन मिला। इसलिए स्थानीय इकाई के विरोध के बावजूद पार्टी ने उन्हें अपना चेहरा बनाया। स्थानीय इकाई सतीश अरोड़ा को टिकट दिलाना चाह रही थी। लेकिन विनोद अग्रवाल की लोकप्रियता और शहर की हिन्दू आबादी पर उनकी पकड़ ने उनका टिकट पक्का करने में मदद की। अब देखना होगा कि विनोद विरोधियों के साथ-साथ अपनों से कैसे निपटते हैं।