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सुनिए महज छह माह की बच्ची की दर्द भरी दास्तां,खुद उसकी जुबानी,भर आएंगी आपकी आंखें

मासूम अपनी नन्ही आंखों से अपने से दूर हो चुके परिजनों को तलाश कर रही है।

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moradabad

जय प्रकाश

मुरादाबाद: आधुनिक दौर में बेटियां किसी से कम नही है जमीन से लेकर आसमा तक लड़कियां अपने हुनर से हर किसी को लोहा मनवा रही है। कई अभिभावकों के लिए आज बेटियां उनका अभिमान है तो कई लोगो के लिए एक मजबूत सहारा। लेकिन मुरादाबाद जनपद में एक दिन पहले कूड़े के ढेर में मिली एक मासूम बच्ची की अपनी एक अलग दास्तान है। मासूम अपनी नन्ही आंखों से अपने से दूर हो चुके परिजनों को तलाश कर रही है । मासूम की नन्ही आंखों में कई सवाल है , सवाल यह कि आखिर वह कूड़े के ढेर में क्यों पड़ी मिली, सवाल यह कि उसको किस गलती की सजा मिल रही है और सवाल यह भी की क्या उसकी जन्म देने वाली मां अब उसे अपनी गोद में लेगी? मासूम को उसके अपनो तक पहुंचाने की कोशिश में जुटी टीम पत्रिका मासूम की इस दास्ताँ को आप तक इस उम्मीद के साथ पहुंचा रहा है कि शायद आप इस नन्ही सी परी के सवालों का जबाब जानते हो ओर उसे उसके अपनो से मिला सके।

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आंखों में नन्ही सी मासूमियत, शरीर पर अच्छे कपड़े और जोर-जोर से चिल्लाती हुई मैं , जी हां आप भी परेशान हो गए ना कि आखिर में इतना क्यों रोती हूँ। आपका चौकना लाजिमी भी है लेकिन में रोने के सिवाय कर भी क्या सकती हूँ। इस ख़ूबससुरत दुनिया में आये मुझे महज आधा साल ही बीता है लेकिन कहते है ना दुनिया के रिवाजो को जानते- समझते जिंदगी गुजर जाती है फिर मैं तो बच्ची हु ना, मुझे भला क्या मालूम दुनिया के नियम कानूनों की। मुझे बोलना नःही आता, सही- गलत का भी कोई पता नहीं लेकिन आपको बताओ मुझे अपनी मां की गोद की पहचान है जो मुझे भरोसा देती है कि मैं अकेली नहीं हूं। लेकिन पता नहीं क्या हो गया अचानक मेरी माँ की गोद मुझसे दूर हो गयी। मुझे तो उनका नाम भी नहीं मालूम, ओहहो मुझे तो अपना नाम भी मालूम नहीं है। कल सुबह जब में जागी तो मैंने अपने आस- पास लोगो की भीड़ देखी थी । कोई मुझे गुड़िया कह रहा था तो कोई परी लेकिन मेरी मम्मी मुझे जिस नाम से पुकारती थी वो नाम पता नहीं क्यों कोई नहीं ले रहा। अब मैं अकेली हूं मेरे साथ कोई नहीं है। लेकिन कई लोग अब मुझे अपने घर ले जाने को तैयार है। आखिर मैं हूं ही इतनी प्यारी बच्ची। लेकिन प्लीज़ मुझे मेरे घर जाना है अपने घर।

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मुझे नहीं मालूम कि मेरे माता-पिता कहा गए और मुझे यहां कौन छोड़ गया। कल मैने सुना था कि पुलिस वाले अंकल मुझे मेरे घर ले जाएंगे और मेरे घरवाले मुझे मिल जाएंगे। आप देखिए ना चौबीस घण्टे से ज्यादा हो गए और किसी ने भी अभी तक मेरी सुध नहीं ली। पुलिस वाले अंकल भी शायद नहीं जानते कि मेरा घर कहां है और उन्हें भी कैसे पता चलेगा आखिर गलती तो मेरी है ना क्योंकि मैं उन्हें बता ही नहीं पा रही। पुलिस को लगता है कि किसी ने मेरा अपहरण कर मुझे यहां छोड़ दिया। लेकिन अभी तक मेरे परिवार वाले भी नहीं आये तलाश करने। फिर लोगो को लगता है कि मेरे घरवालों ने मुझे छोड़ दिया , लेकिन मुझे देखकर आपको लगता है कि कोई मुझे छोड़ कर रह पाएगा। मुझे मालूम होता तो पुलिस वाले अंकल भी परेशान नहीं होते लेकिन मैं क्या कर सकती हूँ। प्लीज आप भी पुलिस वाले अंकल की मदद कीजिये ना। आपकी मदद मुझे मेरे घर पहुंचाएगी और मैं आपको खूब दुआ दूंगी।

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पता कल जब में कूड़े के ढेर में मिली तो लोगो ने मुझे खूब दुलार किया। मुझे दूध पिलाया खाना खिलाया ओर नहलाया भी। मुझे सब अच्छा लगा लेकिन मम्मी नहीं थी ना इसलिए मन नहीं लगा। पता कल मुझे बढ़िया गाड़ी में बैठाया गया और शिशु बाल गृह रामपुर लाया गया है। यहां मेरे जैसे कितने बच्चे है सब के सब मेरी तरह। इनके साथ मुझे सबसे बढ़िया लगा लेकिन आपको बताऊ मेरी तरह इनके घरवाले भी इनसे दूर हो गए है। हम सब एक जैसे ही है सब इंतजार कर रहे है अपने घर जाने का। मुझे बताया गया कि दो साल तक मुझे यही रहना होगा । और यदि इस दौरान मुझे लेने मेरे मम्मी पापा नहीं आये तो फिर मुझे गोद देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। लेकिन भला में क्यों किसी के घर जाऊ, मुझे तो पक्का यकीन है कि मैं अपने ही घर जाऊंगी। बाल कल्याण समिति ने भी मुझे विश्वास दिलाया है कि वो मुझे घर पहुंचाएंगे ओर उन्होंने कोशिस भी शुरू की है। ईश्वर करे उन्हें कामयाबी मिले और सिर्फ मैं ही नहीं इस शिशु गृह में रह रहे हर बच्चे को उसके परिजन वापस मिले।

अब तो आप मुझे पहचान ही गए होंगे। मुझे तो अपना नाम याद नहीं है। लेकिन आपको जो नाम अच्छा लगे उस नाम से मुझे बुला लीजिए आखिर मैं भी तो आपकी अपनी बच्ची जैसी ही हूं । आपको बताऊ इस शिशु गृह में वैसे तो सब ठीक है लेकिन अपना घर तो अपना ही घर होता है ना, आप मुझसे बड़े है ज्यादा जानते है तो प्लीज़ मेरी मदद कीजिये । मुझे वापस अपने घर जाना है अपनी मम्मी से बाते करनी है पापा से शैतानियां करनी है। और मुझे यकीन नहीं पूरा भरोसा है। आप पर ,आप मेरे लिए मेरे परिजनों को अवश्य तलाश करोगे। आखिर इस छोटी बच्ची के इस सपने के लिए आपके पास थोड़ा सा वक्त तो होगा ही। प्लीज़

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