
चंबल नदी फिर से खतरे पर, 89 गांवों में हाई अलर्ट, यहां पढ़ें गांव के नाम
मुरैना. मंदसौर और आसपास के जिलों में हुई भारी वर्षा के कारण गांधी सागर से कोटा बैराज होते हुये चंबल नदी में पिछले 3 दिनों में लगभग 15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। इसके चलते पार्वती नदी के ऑवरफुल होने से चंबल नदी खतरे के निशान से 5 मीटर ऊपर तक बह रही है। चम्बल नदी के किनारे से लगे हुये 85 गांव बाढ़ से प्रभावित हुये है। इनमें से सोमवार को प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 20 गांव के 2 हजार 275 लोगों को राहत कैम्पों में पहुंचाया है।
इन क्षेत्रों में 22 राहत कैम्प खोले गये है। इसके चलते चंबल में जल स्तर बढ़ता जा रहा है।सोमवार की शाम 6 बजे चंबल नदी का जल स्तर 143.50 मीटर था। राजघाट पर नदी केे पुराने पुल पर करीब 5 फुट ऊपर पानी बह रहा था। पानी और बढऩे की संभावना जताई जा रही है। उधर बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना की एनडीआरएफ टीम मुरैना बुलाई गई। उसके द्वारा रेस्क्यू चलाया गया। प्रशासन द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। कई स्थानों पर आर्मी, एसएएफ और होमगार्ड, एसडीआरएफ के जवानों को तैनात किया गया है।
नाव पलटी
उधर कुल्हाड़ा व मऊखेड़ा गांव में बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने जा रहे होमगार्ड के जवानों की नाव पलट गई। वह लोग तैरकर बाहर निकले और बाद में दूसरी नाव लेकर गए तब बाढ़ में फंसी नाव को निकाला गया।
विधायक का दौरा
विधायक बैजनाथ कुशवाह ने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह जादौन, जगदीश बंसल, बासुदेव त्यागी आदि के साथ बाढ़ से प्रभावित सभी गांवों का दौरा किया। अटार पंचायत के मदनपुरा में विधायक उफनती चम्बल में स्टीमर से पहुंचे। वहाँ ग्रामीणों से सम्पर्क किया। साथ ही मौके पर मौजूद पटवारी विनोद कुलश्रेष्ठ को निर्देश दिए कि गांव को तुरंत खाली कराया जाए। सुरक्षित स्थान पर ग्रामीणों के रहने व खाने का उचित प्रबंध किया जाये। उन्होंने ग्रामीणों को भी गांव खाली करने की समझाइस दी। दूसरी ओर एसडीएम और तहसीलदार एक ही गाड़ी से गांवो का दौरा कर रहे हैं। अभी तक प्रशाशन ने किसी भी गांव को खाली नहीं कराया है।
आठ घंटे रेस्क्यू चलने तक बरवासिन रहे एसपी
कितोरी बरवासिन में नाव पंचर होने से डूबी दो बच्चियों में से एक बच्ची की तलाश देर शाम तक चली। इस दौरान पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव ने बरवासिन के आसपास चार-पांच गांव को खाली करवाया।
900 से अधिक लोग फंसे हैं अभी भी
तीन गांव इंद्रजीत का पुरा में 250, रामगढ़ में 350, सुखध्यान का पुरा में 300 कुल मिलाकर 900 से अधिक ग्रामवासी फंसे है। जिनकी कोई भी खाने पीने की व्यवस्था नही है जितना घर में राशन था खत्म हो रहा है प्रशासन ने 2 दिन पहले ही गांव को खाली कराने के लिए कहा था लेकिन गांव वाले अन्य जगह जाने के लिए सहमत नही हुए।
किसरोली व मलबसई में नाव से भोजन पहुंचाया
मल्लाह का पुरा, नींबरीपुरा, घेर से कुछ लोगों को निकालकर बीलपुर कुथियाना में रखा गया है। यहां राहत शिविर में रुके हुए लोगों को भोजन की व्यवस्था की गई। नींबरीपुरा से 33 और रामप्रकाश का पुरा से 10 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। बीलपुर कुथियाना जाते समय रास्ते में पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह तोमर ने बाढ़ पीडि़तों को फल वितरित किए। वहीं पानी बढऩे से भगेश्वरी मंदिर का संपर्क भी टूट गया है।
बहाव देख हाथ खड़े किए
ग्वालियर से आई एनडीआरएफ की 21 जवानों की रेस्क्यू टीम ने भी बहाब तेज होने से हाथ खड़े कर दिए। भूप सिंह का पुरा, रायपुर खुर्द गढिय़ा रायपुर, बिजलीपुरा ये गांव भी पानी से घिर चुके हैं।
और उफनेगी चंबल
जल संसाधन विभाग के एसडीओ ने बताया है कि सात लाख क्यूसेक पानी चंबल में कोटा से छोड़ा गया है उसमें से अभी केवल साढ़े 4 लाख का असर हुआ है। रात तक बकाया ढाई लाख क्यूसेक पानी का असर होते ही चंबल नदी में और पानी बढ़ेगा। चंबल नदी में करीब आठ से दस फुट पानी और बढऩे की संभावना हैं।
मुरैना एसपी डॉ. असित यादव ने बताया कि बरवासिन गांव में नाव डूबने से दो बच्ची चंबल नदी में डूब गई थीं। उनमें से एक का शव निकाला जा चुका है दूसरे की देर रात तक तलाश की लेकिन नहीं मिला। जिले भर से अभी तक करीब दो हजार लोगों को रेस्क्यू ऑपरेशन के द्वारा निकाला जा चुका है।
Published on:
18 Sept 2019 11:31 am
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