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पूर्व CM कमलनाथ का बड़ा दावा : ‘कोरोना से अब तक हो चुकी हैं डेढ़ लाख मौतें’, सरकारी आंकड़ों में 8 हजार, यहां से जानें हकीकत

कमलनाथ ने जहां कोरोना से हुई मौतों की वजह सरकार की प्रबंधकीय नाकामी को बताया। साथ ही उन्होंने एक बार फिर प्रदेश सरकार पर कोरोना से हुई मौते के आंकड़े छुपाने का आरोप लगाया।

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पूर्व CM कमलनाथ का बड़ा दावा : 'कोरोना से अब तक हो चुकी हैं डेढ़ लाख मौतें', सरकारी आंकड़ों में 8 हजार, यहां से जानें हकीकत

मुरैना/ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ कमलनाथ मुरैना पहुंचे यहां रामलीला मंच पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कमलनाथ ने प्रदेश सरकार पर बड़ा हमला किया। कमलनाथ ने जहां कोरोना से हुई मौतों की वजह सरकार की प्रबंधकीय नाकामी को बताया। साथ ही उन्होंने एक बार फिर प्रदेश सरकार पर कोरोना से हुई मौते के आंकड़े छुपाने का आरोप लगाया।

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मौतों के असल आंकड़े जानना है तो श्मशान और कब्रिस्तान जाकर पता करें- कमल नाथ

कमल नाथ ने दावा किया है कि, मध्य प्रदेश में कोरोना से डेढ़ लाख लोगों की मौत हुई है। इसका आधार पूछने पर उन्होंने एक बार फिर वही जवाब देते हुए कहा कि, श्मशान और कब्रिस्तान के आंकड़े शत प्रतिशत हकीकत बता देंगे। चाहें तो सरकार खुद भी इसकी जांच करा ले। वहीं, कोरोना से हुई मौतों का जिम्मेदार भी सरकार की रणनीतिक नाकामियों को बताया।

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कोरोना से मरने वालों को 5 लाख मुआाावज दे सरकार

दूसरी लहर को लेकर सरकार की लापरवाही इससे भी समझ में आती है के देश की और विदेश की मीडिया ने अक्टूबर में ही दूसरी लहर के लिए सचेत कर दिया था। इसलिए इन मौतों के लिए सरकार जिम्मेदार है और कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार बतौर मुआवजा 5 लाख दें। साथ ही, उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जानी चाहिए। कोरोना से मौत का चिकित्सीय प्रमाण पत्र लेने की बजाए परिजन का शपथ पत्र मान्य किया जाए। शपथ पत्र के आधार पर जो व्यक्ति आवेदन करें, बैंकों के माध्यम से उनके खातों में 5 लाख रुपए की राशि जमा करवाई जाए। क्योंकि कोरोना से मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों को गंभीर व्यवहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

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सरकार की नाकमी से बना ऑक्सीजन संकट

कमलनाथ ने आगे कहा कि, कहा कि शिवराज सरकार को ये भी नहीं मालूम कि, ऑक्सीजन के टैंकर कहां बनते हैं। इसी वजह से प्रदेश में ऑक्सीजन का संकट आया, जो लोगों की जान जाने का कारण बना। कमलनाथ ने छिंदवाड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि, वहां मात्र एक दिन के लिए ऑक्सीजन का संकट आया था, लेकिन हमने तुरंत व्यवस्था करवा दी और आसपास के क्षेत्रों में भी पर्याप्त ऑक्सीजन की व्यवस्था कर दी गई है।