
सालों पुराने प्राचीन दाऊजी मंदिर में भगवान द्वारिकाधीश भक्तों को देते है दर्शन, जानिए
मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में भगवान द्वारिकाधीश साढ़े तीन दिन की मेहमानी करेंगे। जिनके दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में लोग आते हैं। मुरैना गांव स्थित प्राचीन दाऊजी मंदिर है, जहां आज से लीला मेला शुरू हो रहा है। ऐसी मान्यता है कि 300 साल पुराने इस मंदिर पर भगवान द्वारिकाधीश अपना धाम छोडकऱ गांव में मेहमानी करने आते हैं। इस मेला की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आसपास क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों के हजारों लोग इस दौरान मंदिर पर भगवान दाऊजी की पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। मुरैना गांव स्थित लीला मेला में बाकायदा भगवान द्वारिकाधीश रथ पर विराजमान होकर निकलते हैं।
इस दौरान नागलीला का मंचन भी होता है। गांव के स्वामी परिवार में हर साल जन्मे नवजात शिशु के जरिए यह नाग को नाथा जाता है। साढ़े तीन दिन तक चलने वाले लीला मेला के दौरान जहां धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृ़तिक आयोजन होते हैं। वहीं यहां की घोड़ी रेस पूरे देशभर में विख्यात है, इसमें भाग लेने के लिए दूर-दराज के घुड़सवार यहां अपनी-अपनी घोडिय़ों को सजाकर हिस्सा लेने आते हैं। भगवान द्वारिकाधीश का धाम होने की वजह से मुरैना गांव में मोर बहुतायात संख्या में पाई जाती है,जो यहां की पहचान भी है।
गुजरात के द्वारिका में बंद रहते हैं पट
दाऊजी मंदिर के महंत बताते हैं कि भगवान द्वारिकाधीश साढ़े तीन दिन तक जब मुरैना गांव में रहते हैं तब गुजरात के द्वारिका में द्वारिकाधीश मंदिर के पट बंद रहते हैं। क्योंकि भगवान की पूजा-अर्चना मुरैनागांव में होती है। उल्लेखनीय है कि चार धाम के तीर्थ यात्रियों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है। कुछ यात्रियों ने यह भी बताया कि श्रीनाथजी में भी दीपावली पर कहा जाता है कि अभी भगवान की पूजा मुरैना में हो रही है।
जब गोपराम को ब्रह्मलोक ले गए थे द्वारिकाधीश
दाऊजी मंदिर के महंत स्वामी बताते हैं कि 765 साल पहले मुरैना गांव निवासी कृष्ण भक्त संत गोपराम स्वामी को भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिए और अपने साथ ब्रह्मलोक ले जाने लगे। गोपराम बाबा भगवान द्वारिकाधीश से कहा कि लोग कैसे जानेंगे कि आप मुझे लेने मुरैना गांव आए थे। स ्वप्न में ही भगवान श्रीकृष्ण ने संत गोपराम से वादा किया था कि मैं हर साल दीपावली की पड़वा से चौथ तक के लिए मुरैना गांव में मेहमानी करने आया करूंगा। उसी समय से लगातार द्वारकाधीश हर साल दीपावली की पड़वा से साढ़े तीन दिन की मेहमानी करने मुरैना गांव आते हैं।
हर साल होता है बेटे का जन्म
भगवान ने संत गोपराम स्वामी को यह भी वचन दिया था कि मेरी यहां दीवाली पर उपस्थिति यूं मानी जाए कि मेरे यहां आगमन से पहले दीपावली के त्यौहार के नजदीक (15 दिन पहले) इस गांव के स्वामी परिवारों में किसी न किसी के घर बेटे का जन्म अवश्य होगा।
गोपराम के नाम से पुजते हैं भगवान द्वारिकाधीश
कलि में आइ करौली न देखी, और न देखी मुरैना की लीला। यानी कलियुग में आकर अगर करौली कैलादेवी मां के दर्शन नहीं किए और मुरैना गांव दाऊजी मंदिर की लीला नहीं देखी तो मानो कुछ नहीं देखा। जी हां, यही महत्व है लीला मेले का, जिसमें भगवान द्वारिकाधीश की यहां साढ़े तीन दिन तक मान्य उपस्थिति रहेगी। खास बात है कि मुरैना गांव के दाऊजी मंदिर पर बलदाऊ की प्रतिमा नहीं है, बल्कि यहां भगवान द्वारिकाधीश की प्रतिमा है। यह प्रतिमा दाऊ यानी संत गोपराम बाबा के नाम से पुजती है, जिनकी समाधि मंदिर परिसर में ही बगल से बनी है।
रिश्ते भी होते है पक्के
बताया जाता है कि इस प्राचीन लीला मेला की एक विशेषता यह भी है कि यहां कई समाज के लोग आपस में मिलते-जुलते हैं और दाऊजी मंदिर परिसर में अपने विवाह योग्य बेटे-बेटियों के सगाई-संबंध पक्के करते हैं। लोग सालभर इस मेले का इंतजार करते हैं, ताकि वे भगवान के सामने अपने बच्चों के संबंध पक्का कर सकें। इसके साथ ही इस मेले में हजारों की संख्या में भक्त भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं।
Published on:
28 Oct 2019 08:30 am
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