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‘स्कर्ट पहनकर मैदान में उतरी तो…’, हॉकी खिलाड़ी कृष्णा शर्मा के संघर्ष की कहानी

Junior Women Hockey Team India: चंबल की बेटी कृष्णा शर्मा का भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में चयन हो गया है। कृष्णा शर्मा ने कहा जब मैं पहली बार हॉकी की स्कर्ट पहनकर मैदान में उतरी तो लोगों ने मेरे खेल से ज्यादा मेरे पहनावे पर बातें कीं। मुझे तकलीफ जरूर हुई, लेकिन मैंने...। जानिएहॉकी खिलाड़ी कृष्णा शर्मा के संघर्ष की कहानी।
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Krishna Sharma Hockey

Krishna Sharma Hockey कृष्णा शर्मा का भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में चयन (source: patrika)

Krishna Sharma Hockey: चंबल अंचल की हॉकी खिलाड़ी कृष्णा शर्मा को पहली बार भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में प्रतिनिधित्व मिला है। मुरैना जिले की अंबाह तहसील के ग्राम बरबाई से संबंध रखने वाली कृष्णा शर्मा भारतीय जूनियर महिला (अंडर-21) हॉकी टीम में चयनित की गई है।

पहली बार भारतीय जर्सी में होंगी कृष्णा शर्मा

हॉकी इंडिया द्वारा घोषित 24 सदस्यीय टीम 5 से 14 जुलाई तक यूनाइटेड किंगडम(यूके) के दौरे पर स्कॉटलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका और बेल्जियम की जूनियर टीमों के खिलाफ सात अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलेगी। कृष्णा पहली बार भारतीय जर्सी पहनकर विदेश में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनकी उपलब्धि ने ग्वालियर-चंबल ही नहीं, पूरे अंचल का गौरव बढ़ाया है। अंबाह के ग्राम बरबाई निवासी कपूरचंद्र बरोलिया बताते हैं कि उनके दामाद सुनील शर्मा और बेटी माया शर्मा ने अपनी होनहार सुपुत्री कृष्णा को ग्वालियर रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों के लिए तैयार कराया। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी के सपनों को कभी रुकने नहीं दिया। पिता की दिलाई साइकिल से कृष्णा रोज करीब आठ किलोमीटर का सफर तय कर अभ्यास के लिए अकादमी पहुंचती थीं।

चोटिल होने पर आए थे 16 टांके

संघर्ष के दौरान एक मैच में हॉकी गेंद उनकी आंख के नीचे लगी और 16 टांके आए। कुछ समय के लिए मैदान से दूर रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दर्द पर लक्ष्य भारी पड़ा और वह पहले से अधिक ²ढ़ संकल्प के साथ मैदान में लौटीं। राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। अपनी तेज रफ्तार के कारण साथी खिलाड़ी उन्हें ’स्पीडी’ के नाम से बुलाते हैं। अब उनका लक्ष्य जूनियर एशिया कप, विश्व कप और ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है।

पहनावे पर बातें ज्यादा की

भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में चयनित कृष्णा शर्मा कहती हैं, जब पहली बार हॉकी की स्कर्ट पहनकर मैदान में उतरी तो लोगों ने मेरे खेल से ज्यादा मेरे पहनावे पर बातें कीं। शुरुआत में तकलीफ जरूर हुई, लेकिन मैंने कभी जवाब नहीं दिया। मुझे भरोसा था कि एक दिन मेरी पहचान मेरे खेल से होगी।

ओलंपिक तक पहुंचना अब लक्ष्य

हॉकी इंडिया की सूची में अपना नाम देखकर कुछ पल के लिए विश्वास ही नहीं हुआ। महीनों की मेहनत एक पल में सफल हो गई। सबसे पहले परिवार को यह खुशखबरी दी। उनके चेहरे की खुशी मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार थी।

विदेशी टीमों से भिडऩा रोमांचक होगा

यह मेरे करियर का सबसे बड़ा अवसर है। मजबूत विदेशी टीमों के खिलाफ खेलने से अंतरराष्ट्रीय हॉकी को करीब से समझने और खुद को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा। जूनियर एशिया कप की तैयारी के लिए भी यह अनुभव बेहद अहम रहेगा।

मैदान में मेरी स्पीड ही मेरी ताकत

मेरी स्पीड। तेज गति के साथ गेंद पर नियंत्रण मेरी सबसे बड़ी ताकत है। इसी वजह से साथी खिलाड़ी मुझे स्पीडी कहकर बुलाते हैं। मेरा अगला लक्ष्य जूनियर एशिया कप टीम में जगह बनाना है। इसके बाद विश्व कप और ओलंपिक में भारत के लिए खेलना और देश को पदक दिलाना मेरा सबसे बड़ा सपना है।

हॉकी अकादमी से मजबूती मिली

भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में चयनित कृष्णा शर्मा ने अपनी खेल यात्रा की बुनियादी तैयारी ग्वालियर स्थित मध्यप्रदेश महिला हॉकी अकादमी से की। सीमित संसाधनों के बावजूद वह प्रतिदिन करीब आठ किलोमीटर साइकिल चलाकर अकादमी पहुंचकर अभ्यास करती थीं।