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11 बच्चों के सिर से उठ गया माता-पिता का साया, रो-रोकर सूख गए आंख के आंसू

बच्चे रह-रहकर अपने माता-पिता को याद करके दिन रात रोते हैं, हालात यह है कि रो-रोकर बच्चों की आंख के आंसू भी सूख चुके हैं, बच्चे अब इतने सहम गए हैं कि उनके मुहं से शब्द भी नहीं निकल रहे हैं.

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मुरैना. जमीन विवाद के कारण हुए गोलीकांड में 11 मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है, बच्चे रह-रहकर अपने माता-पिता को याद करके दिन रात रोते हैं, हालात यह है कि रो-रोकर बच्चों की आंख के आंसू भी सूख चुके हैं, बच्चे अब इतने सहम गए हैं कि उनके मुहं से शब्द भी नहीं निकल रहे हैं, क्योंकि अपने ही घर के आंगन में बच्चों ने ऐसा गोलीकांड देखा है, जिसमें अपनों ने ही अपनों का बेरहमी से खून किया है, ये मंजर बार-बार उनकी आंखों के सामने आ रहा है।

लेपा में हुए वीभत्स हत्याकांड में छह लोगों (तीन महिलाओं, तीन पुरुषों) असमय काल के गाल में समा गए। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन इस हादसे में सबसे अधिक झकझोरा है मृतक परिवार के मासूम बच्चों को। जिन तीन महिलाओं की मौत हुई, उनके नौ मासूम बच्चे मां के आंचल से वंचित हो गए। वहीं दो बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।

तीन मां और एक पिता के थे 11 बच्चे

मधुदेवी: परिवार की सबसे छोटी बहू मधुदेवी अपने पीछे छह साल की मासूम बेटी शानू को छोड़ गई हैं। वहीं हत्या के वक्त मधु के पेट में 7 महीने का गर्भ था।

केशकुमारी: 46 साल की केशकुमारी अपने पीछे चार मासूम बच्चे छोड़ गई हैं। इनमें बड़ी बेटी वंदना (18), रंजना (16), सुंदरी (12) तथा बेटा शिवा (10) सबसे छोटा है।

बबली: बवली भी अपने पीछे चार बच्चे छोड़ गई हैं। इनमें संध्या (18), गोलू (16), शिवानी (14) व सबसे छोटी खुशबू मात्र आठ साल की है।

संजू सिंह: परिवार के मुखिया गजेंद्र सिंह बेटे संजू सिंह की भी गोलीकांड में मौत हुई है। संजू अपने पीछे बेटा सचिन (12) व बेटी अनामिका (10) छोड़ गए हैं।

लेपा गांव में हुई छह हत्याओं के बाद पुलिस-प्रशासन द्वारा मनाने के बाद पीड़ित परिवार अंतिम संस्कार करने के लिए 19 घंटे बाद तैयार हुआ। गांव से एंबुलेंस के जरिए सभी छह लोगों के शवों को गांव के बाहर मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां पहले से छह चिताएं तैयार थीं। यहां केशकुमारी (46) को उसके 10 साल के मासूम बेटे शिवा ने मुखाग्नि दी। इसी प्रकार बबली (36) के शव को पति महेंद्र सिंह, संजू सिंह (42) का 12 साल के बेटे सचिन ने अंतिम संस्कार किया। चूंकि सत्यप्रकाश (30) के कोई संतान नहीं थी। इसलिए उसे भी भतीजे सचिन ने ही मुखाग्नि दी। पिता व चाचा की चिता को मुखाग्नि देते वक्त मासूम सचिन के हाथ कांप रहे थे। उसे सिर्फ इतना पता था कि पापा-चाचा अब इस दुनियां में नहीं रहे। वहीं सुनील ने अपने पिता गजेंद्र सिंह (65) व पत्नी मधुदेवी का अंतिम संस्कार किया।

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