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सास – ससुर ने निभाया माता – पिता का फर्ज, विधवा बहु का किया कन्यादान

बेटे की दो साल पहले हार्ट अटैक से हुई थी मौत। ससुर ने विधवा बहू के हाथ पीले कर बेटी की तरह विदा किया।

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सास - ससुर ने निभाया माता - पिता का फर्ज, विधवा बहु का किया कन्यादान

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह में हुए एक पुर्नविवाह ने तमाम सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए समाज को जगाने का संदेश देने का काम किया है। ससुर ने अपनी विधवा बहू टीनू तोमर के लिए नया वर तलाश करके उसकी सूनी जिंदगी को संवारने का काम किया है। ससुर ने अपनी बहू को बेटी की तरह विदा किया। इस पुर्नविवाह की सबसे खास बात ये थी कि विधवा बहू के लिए रिश्ता तलाशने से लेकर शादी कराने का जिम्मा माता - पिता की बजाए ससुर ने पूरा किया।


ग्राम महासुख का पुरा अंबाह शहर के लेन रोड निवासी बीएसएफ के सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर प्रमोद सिंह तोमर ने विधवा बहू का मंगलवार को पुनर्विवाह कर उसको सुसराल के लिए विदा कर दिया। प्रमोद ससुर और सास पुष्पा तोमर ने माता - पिता बनकर बहू को गृहस्थ जीवन में प्रवेश करवाया। उन्होंने बहू को बेटी मानते विवाह किया। जहां पुनर्विवाह की हमारे समाज में कुप्रथा के रूप में मान्यता है। वहीं अंबाह के तोमर परिवार ने अनुकरणीय पहल की है।

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हार्ट अटैक से हुई थी बेटे की मौत

उल्लेखनीय है कि, दिल्ली में रहने वाली टीनू 20 फरवरी 2015 को उनके इकलौते बेटे सॉफ्टवेयर इंजीनियर भूपेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू की पत्नी बनकर आई थी। 20 अक्टूबर 2022 को हार्ट अटैक की वजह से गुड्डू की मौत होने से 24 वर्षीय टीनू का सुहाग उजड़ गया। इससे बहू टीनू उदास रहने लगी। टीनू के न पिता हैं और न भाई। ऐसे में बहू को बेटी मानने वाले इस परिवार को अपनी बहू के आगामी जीवन की चिंता थी। तोमर परिवार ने दो साल बाद अपनी बहू का 25 वर्षीय श्यामू के साथ पुनर्विवाह किया।


ससुर ने तलाश किया बहु के लिए वर

श्यामू प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है। प्रमोद तोमर ने बाकायदा वर की तलाश की और योग्य वर तलाश करने के बाद अंबाह में ही निजी मैरिज होम में विवाह करवाया। इतना ही नहीं, तोमर परिवार ने अपनी बहु के पुन: विवाह के समय होने वाली हर रस्म अदा की। शादी में कन्यादान की रस्म बुआ और फूफा ने निभाई।

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शादी का जोड़ा पहनते ही टीनू की भर आई आंखें

दो साल बाद मंगलवार को टीनू ने जब शादी का जोड़ा पहना तो उसकी आंखे भर आई। उसको नहीं पता था कि पिता को खोने के बाद उसको ससुर नहीं पिता ही मिले हैं। विवाह का खर्च भी तोमर परिवार ने स्वयं उठाया। उपस्थित लोगों ने वर वधू को आशीर्वाद दिया। सभी लोगों ने प्रमोद तोमर के इस प्रयास की काफी प्रशंसा की।

बहू के भविष्य के लेकर किया फैसला

प्रमोद तोमर ने बताया कि, शादी के 5 साल बाद मेरे इकलौते बेटे की मौत हो गई। ऐसे में हमारी सबसे बड़ी चिंता थी कि विधवा होने के बाद बहू अपना जीवन यापन कैसे करेगी। यह सोचकर हमने उसकी शादी कराने का निर्णय कर लिया था। छोटे भाई के बेटे श्यामू के साथ उसकी शादी भी तय की। इसका नाते-रिश्तेदारों ने विरोध किया। कहा कि इससे पहले अपने यहां ऐसा कभी नहीं हुआ, यह क्या अनर्थ करने जा रहे हो, लेकिन हमने मंगलवार को अपनी बेटी रूपी बहू का फिर से घर बसा दिया। इससे हमारी आत्मा को सुकून मिल गया। यदि बहू को बेटी मानते हैं तो उसके जीवन की हर पल की खुशी के लिए ऐसे कदम उठाने चाहिए।


बहू बेटी के अंतर को खत्म करेगा विवाह

नवविवाहिता टीनू तोमर का कहना हैं कि पुनर्विवाह के लिए मैंने अपने पिता तुल्य ससुर से मना किया। ससुर ने कहा जीवन लंबा है, दूसरा विवाह कर लो उन्हीं ने हमारे लिए जीवनसाथी की तलाश की। टीनू ने अपने पिता तुल्य ससुर का धन्यवाद करते है हुए कहा कि इनके जैसा संदेश समाज को आपस में जोड़ेगा और बहू बेटी के अंतर को खत्म करेगा।