
1994 में देश में किन्नरों को मतदान का अधिकार मिला लेकिन देश को पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी (1998) और पहली महापौर कमला जान मप्र से ही मिली थीं। इतना ही नहीं वर्ष 2018 में तो अंबाह सीट सहित मप्र में पांच किन्नरों ने चुनाव मैदान में अपनी ताल ठोककर भाजपा-कांग्रेस, बसपा जैसे राष्ट्रीय दलों को सीधी चुनौती दे दी थी। भारतीय समाज में किन्नर, स्त्रियों की अपेक्षा और भी ज्यादा हाशिए पर है क्योंकि उनके सामने अभी तक अपनी पहचान और सम्मान का ही संकट है। इस तबके के लिए राजनीति में हाथ आजमाना और भी बड़ी बात है।
2018 में हुए चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा डकैतों के लिए कुख्यात चंबल के बीहड़ में स्थित मुरैना जिले की अंबाह विधानसभा सीट की रही। मप्र विधानसभा चुनाव के सियासी रण में एक फीसदी से भी कम वोट हिस्से वाले किन्नर राज्य की पांच विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार थे।
2018 : इन किन्नरों ने लड़ा था चुनाव
नेहा किन्नर ने तोमरों के गढ़ में दिखाया दम-खम
2018 के विस चुनाव में अंबाह (आरक्षित) सीट से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समर्थित भाजपा प्रत्याशी गब्बर सखवार, कांग्रेस के कमलेश जाटव, बसपा के सत्यप्रकाश सखवार के साथ निर्दलीय नेहा किन्नर मैदान में उतरीं। वो 23.85 फीसदी वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहीं। इस सीट पर कांग्रेस के कमलेश जाटव 37343 वोट, नेहा किन्नर को 29796, और भाजपा के गब्बर को 29715 वोट मिले थे। इस तरह यहां भाजपा तीसरे नंबर और बसपा चौथे स्थान पर रही थी।
Updated on:
06 Nov 2023 11:09 am
Published on:
06 Nov 2023 10:45 am
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