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धर्मसभा में बैठने से मिलती है मन को शांति और निर्मलता : मुनि विबोधसागर

श्री दिगंबर बड़ा जैन में मंदिर में मुनिराज के सानिध्य में 15 अगस्त को विभिन्न कार्यक्रम ाआयोजित किए जाएंगे। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा

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मुरैना. धर्मसभा में सदैव तीर्थंकरों की वाणी का श्रवण करना चाहिए। जीव, अजीव, आर्सव, बंध, निर्जरा और मोक्ष की बातों की चर्चा करना चाहिए। सच्चे अर्थों में धर्म सभा या सत्संग वही होता है जिसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र की चर्चा की जाती है। ये सारी चर्चाएं एक दूसरे के इर्द गिर्द घूमेंगी, ये सभी घूम फिरकर जीव और पुदगल पर आ जाएगी। यदि इसे आप समझ गए, तो समझो सबकुछ समझ गए। यदि आप आर्सव को, कर्म को समझ गए तो अन्य बातें भी आपकी समझ में आने लगेंगी। उक्त उदगार बड़े जैन मंदिर में मुनि विबोधसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए

जैन मुनि ने कहा कि जब भी हमें किसी सत्संग में अथवा धर्मसभा में बैठने का अवसर मिले तो इस पावन अवसर को चूकना नहीं चाहिए। धर्म सभा में मन वचन काय से शुद्धि पूर्वक बैठना चाहिए। सत्संग और धर्म सभा में बैठने मात्र से मन को शांति और निर्मलता प्राप्त होती है। भले ही धर्मसभा में आपकी समझ में कुछ नहीं आ रहा है, लेकिन जब तक आप वहां बैठे हैं, तब तक पाप कर्मों से बचे हुए हैं। यदि आपने कर्म बंधन से बचने का तरीका सीख लिया तो एक दिन कर्मों की निर्जरा भी करने लगोगे। धर्म सभा में सदैव धर्म की ही चर्चा में समय व्यतीत करना चाहिए, इधर उधर की फालतू चर्चा कदापि नहीं करना चाहिए।


उत्कृष्ट प्रतियोगी होंगे सम्मानित


15 अगस्त को होने वाली तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का परिणाम शाम को घोषित किया जाएगा। संयोजक डॉ. मनोज जैन एवं विमल जैन बबलू ने बताया कि 15 अगस्त को युगल मुनिराजों के सान्निध्य में तीर्थंकर आदिनाथ एवं पाश्र्वनाथ स्वामी प्रतियोगिता के परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद ही उत्कृष्ट प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया जाएगा।