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Dearness Allowance: एसटी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, महंगाई भत्ता में हुआ 6 फीसदी का इजाफा

7th Pay Commission 7th CPC News: महाराष्ट्र सरकार ने एमएसआरटीसी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में छह प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। एमएसआरटीसी के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शेखर चन्ने (Shekhar Channe) ने इसकी पुष्टी की है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Nov 17, 2022

Maharashtra ST BUS

महाराष्ट्र के एसटी कर्मचारियों पर फिर मंडरा रहा आर्थिक संकट

7th Pay Commission ST Employees Dearness Allowance Hike: महाराष्ट्र के हजारों एसटी कर्मचारियों (Maharashtra State Transport Employee) के लिए अच्छी खबर है. दरअसल शिंदे-फडणवीस सरकार ने एसटी कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत एसटी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) बढ़ाया गया है। महंगाई भत्ते में कुल 6 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) को पैसे आवंटित किए जाएंगे।

मिली जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने एमएसआरटीसी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में छह प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। एमएसआरटीसी के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शेखर चन्ने (Shekhar Channe) ने इसकी पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने डीए को मौजूदा 28 फीसदी से बढ़ाकर 34 फीसदी करने की मंजूरी दे दी है। इस बढ़ोतरी से राज्य के स्वामित्व वाली सार्वजनिक परिवहन संस्था पर प्रति माह 15 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा। यह भी पढ़े-Maharashtra: राज्य परिवहन के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, शिंदे सरकार ने दिया दिवाली बोनस का तोहफा

यूनियन लीडर श्रीरंग बर्गे (Shrirang Barge) ने कहा कि वे सरकार के इस फैसले से खुश हैं, हालांकि यह निर्णय चार महीने से लंबित था। बर्गे ने कहा, "एमएसआरटीसी के कर्मचारियों को भी महंगाई भत्ता बकाया मिलना चाहिए क्योंकि अतीत में राज्य सरकार ने इसका भुगतान नहीं किया है।"

आपको बता दें कि निगम के पास 80,000 से अधिक कर्मचारियों का कार्यबल है। पिछले साल, राज्य सरकार के साथ निगम के विलय सहित विभिन्न मांगों को लेकर MSRTC के कर्मचारी पांच महीने से अधिक समय तक हड़ताल पर रहे थे। एमएसआरटीसी 16,000 से अधिक बसों के बेड़े के साथ देश के सबसे बड़े सरकारी स्वामित्व वाले सार्वजनिक परिवहन उपक्रमों में से एक है। लेकिन कमाई से अधिक खर्च के कारण लंबे समय से वित्तीय संकटों से जूझ रहा हैं।