
अजित पवार का सीएम बनने का सपना रहा अधूरा
Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से पूरे राज्य में शोक का माहौल है। बता दें, बुधवार सुबह प्लेन क्रैश होने की वजह से उनकी मौत हो गई। उन्होंने राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह राजनीति में कई बड़े पदों पर कार्यरत रहे हैं, लेकिन उनकी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा अधूरी रह गई। हालांकि वह छह बार डिप्टी सीएम बने, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन सके। इस बारे में उन्होंने कई बार खुले मंच पर इस इच्छा के बारे में अपने भाव व्यक्त किए हैं। उनके निधन को राजनीति के आखिरी सर्वाइवर के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
अजित पवार ने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी इस ख्वाहिश का जिक्र करते हुए कहा था कि अगर वह शरद पवार के बेटे होते तो वह जरूर सीएम बन जाते। वह उनके बेटे नहीं हैं, इसलिए शायद उन्हें सीएम बनने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने इसे उनके खिलाफ अन्याय बताया था। इसी वजह से वह शरद पवार की पार्टी से अलग हो गए थे और एनसीपी पार्टी के दो हिस्से हो गए थे। उनका यह बयान और कदम महाराष्ट्र की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बना था।
अजित पवार महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बार डिप्टी सीएम बनकर रिकॉर्ड बनाया है। वह सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेता रहे हैं। 2024 के विधानसभा के चुनाव के बाद उन्होंने छठी बार डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले भी वह अलग-अलग सरकारों में इस जिम्मेदारी को निभा चुके थे। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम के पद पर काम किया। उन्होंने साल 2010 में पहली बार डिप्टी सीएम का पद संभाला था। 2010 के बाद साल 2012 में कांग्रेस और एनसीपी की सरकार बनी, तब अजित पवार को फिर से उपमुख्यमंत्री बनाया गया। नवंबर 2019 में देवेंद्र फडणवीस की सरकार कुछ ही दिनों के लिए बनी थी, उस दौरान भी वह डिप्टी सीएम रहे। इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार में भी उन्होंने उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी ही संभाली थी। उसके बाद साल 2022 में भी वह डिप्टी सीएम बने थे।
अजित पवार के मुख्यमंत्री बनने में हमेशा से परेशानियां आती रहीं, जिस वजह से राजनीतिक गलियारों में इस विषय पर तरह-तरह की बातें होती रहीं। कहा जाता है कि 2004 के विधानसभा चुनाव में एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी मुख्यमंत्री पद पर आगे नहीं आई। हालांकि बाद में अजित पवार ने माना कि उस समय सीएम का पद छोड़कर उन्होंने सबसे बड़ी गलती की। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय ऐसा इसलिए हुआ था ताकि अजित पवार पार्टी में दूसरे नंबर के नेता नहीं बनें।
Updated on:
28 Jan 2026 05:45 pm
Published on:
28 Jan 2026 01:53 pm

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