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बांद्रा में चला बुलडोजर: क्यों याद आए बॉलीवुड दिग्गज सुनील दत्त? जानिए वह सच जो कोई नहीं बता रहा

Bandra Demolition: मुंबई के बांद्रा गरीब नगर में रेलवे की तोड़फोड़ के बाद बेघर हुए लोगों को आज भी अपने पूर्व सांसद और अभिनेता सुनील दत्त की याद आ रही है, जिन्होंने हमेशा झुग्गी-झोपड़ी वालों के हक की लड़ाई लड़ी थी।

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मुंबई

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Pooja Gite

May 23, 2026

Nargis Dutt Nagar

photo social media

Bandra Demolition: मुंबई के बांद्रा ईस्ट स्थित गरीब नगर में इस हफ्ते जब रेलवे के बुलडोजर चले, तो वहां के बेघर होते लोगों को किसी नेता की नहीं, बल्कि अपने मसीहा और बॉलीवुड अभिनेता सुनील दत्त की याद आई। साल 2005 में दुनिया छोड़ चुके सुनील दत्त आज 20 साल बाद भी बांद्रा के गरीबों के दिलों में जिंदा हैं। जानिए कैसे इस तोड़फोड़ का कनेक्शन सुनील दत्त की विरासत से जुड़ा है।

गरीबों के रक्षक या राजनीति के शिकार?

ज्यादातर भारतीय सुनील दत्त को फिल्म मदर इंडिया के उस हीरो के रूप में जानते हैं, जिन्होंने आग से नरगिस की जान बचाई और फिर उनसे शादी कर ली। लेकिन बांद्रा के झुग्गी-झोपड़ी वालों के लिए वह एक सांसद MP थे, जिन्होंने पांच बार संसद में उनका प्रतिनिधित्व किया।

सुनील दत्त ने झुग्गियों को कानूनी सुरक्षा दिलाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया और कट-ऑफ तारीख को आगे बढ़वाया। खबरों के मुताबिक, उन्होंने खुद सोनिया गांधी से बात करके तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के जरिए मुंबई की झुग्गियों पर बुलडोजर चलने से रुकवाया था। जब एयरपोर्ट के पास की झुग्गियां हटाई जा रही थीं, तब उन्होंने बांद्रा कलेक्टर ऑफिस तक मोर्चा निकाला था।

पत्नी नरगिस के नाम पर बनी बस्ती और विवाद

1981 में पत्नी नरगिस के निधन के बाद, सुनील दत्त ने बांद्रा में एक झुग्गी बस्ती का नाम नरगिस दत्त नगर रखा। यह एक भावुक पति का फैसला था, लेकिन समय के साथ यह जगह मुंबई का सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद बन गई। 1994 में जहां सिर्फ 40 झुग्गियां थीं, वह 2013 तक आते-आते लीलावती अस्पताल तक फैल गईं और वहां कई मंजिला अवैध मकान बन गए। स्थानीय नागरिक संगठनों का आरोप था कि नेता लोग चुनाव जीतने और वोट बैंक के चक्कर में इन अवैध निर्माणों पर आंखें मूंद लेते थे।

क्या सुनील दत्त को उठानी पड़ी इसकी राजनीतिक कीमत?

हां, झुग्गी वालों का साथ देने की वजह से बांद्रा, खार और जुहू के टैक्स देने वाले आम नागरिक सुनील दत्त से नाराज हो गए। लोगों का मानना था कि वह सिर्फ झुग्गी वालों की सुनते हैं और आम जनता की समस्याओं जैसे फुटपाथों पर अतिक्रमण को नजरअंदाज करते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि 2004 के चुनाव में सुनील दत्त की जीत का अंतर आधा रह गया 85,500 वोटों से घटकर सिर्फ 47,000 वोट। इसके एक साल बाद मई 2005 में उनका निधन हो गया।

इस हफ्ते गरीब नगर में क्या हुआ?

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिमी रेलवे ने बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास गरीब नगर में अवैध निर्माणों को हटाने के लिए भारी पुलिस बल और बुलडोजरों के साथ बड़ी कार्रवाई की है। यह जमीन सांताक्रुज-मुंबई सेंट्रल कॉरिडोर के विस्तार 5वीं और 6ठी रेलवे लाइन के लिए जरूरी है, जिससे करीब 50 नई ट्रेनें चल सकेंगी। कोर्ट ने साफ किया है कि जो लोग सर्वे में योग्य पाए जाएंगे, उन्हें इसके बदले में दूसरे घर दिए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 100 परिवारों को घर दिए जा चुके हैं, जबकि बाकी को अवैध माना गया है।

'आज सुनील दत्त होते तो'…

गरीब नगर के लोगों में नेताओं को लेकर भारी गुस्सा है। 1981 से वहां रह रहे एक निवासी ने कहा, आज अगर सुनील दत्त होते, तो किसी की हिम्मत नहीं थी जो हमें यहां से हिला भी देता। वहीं एक महिला ने बांद्रा के मौजूदा विधायक वरुण सरदेसाई पर सवाल उठाते हुए कहा, चुनाव के समय उन्होंने कहा था कि कोई दिक्कत हो तो मेरे पास आना।

'जब वोट चाहिए होते हैं, तब हम अवैध लोग भी वैध हो जाते हैं'

हमारे पास सारे सरकारी पहचान पत्र हैं, फिर भी बिना सर्वे हमारा घर तोड़ दिया गया। अब हम किसके पास जाएं? एक स्कूल टीचर ने सीधे शब्दों में कहा, जब वोट चाहिए होते हैं, तब हम अवैध लोग भी वैध हो जाते हैं। आज जब हमें निकाला जा रहा है, तो कोई नेता नजर नहीं आ रहा। लगभग 400 निवासियों में से 300 से ज्यादा परिवार आज खुले आसमान के नीचे आ गए हैं और उन्हें सुनील दत्त की कमी शिद्दत से महसूस हो रही है।