
ठाणे में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में आई दरार?
BJP Shiv Sena Alliance Tension: महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन की सरकार में तनाव आने की खबर है। यहां तक कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे (Dr Shrikant Shinde) ने इस्तीफे की पेशकश की है। इससे यह बात साफ हो गई है कि शिंदे-फडणवीस सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बीजेपी-शिवसेना में गठबंधन में खटास कल्याण लोकसभा सीट को लेकर बताया जा रहा है। जहां से सीएम शिंदे के बेटे श्रीकांत सांसद है।
एक वीडियो जारी कर कल्याण लोकसभा सीट से सांसद श्रीकांत शिंदे ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के कुछ नेताओं की बैठक हुई है, जिसमें महाराष्ट्र के मंत्री पीडब्ल्यूडी मंत्री रवींद्र चव्हाण (PWD Minister Ravindra Chavan) भी शामिल हुए थे। इस बैठक में कल्याण लोकसभा सीट से शिंदे गुट की शिवसेना को हटाने और बीजेपी के उम्मीदवार को जिताने पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि इस सीट से अगला उम्मीदवार कौन होगा, ये बीजेपी-शिवसेना गठबंधन तय करेगा। अगर मुझसे किसी को तकलीफ है तो मै खुद हट जाऊंगा। यह भी पढ़े-संजय राउत पर बीजेपी नेता ने कसा तंज, कहा- भांडुप के देवानंद में हिम्मत है तो...
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, डोंबिवली के कुछ नेता अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए बीजेपी-शिंदे गुट गठबंधन के लिए बाधाएं पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे किसी पद की लालसा नहीं है। बीजेपी-शिवसेना का वरिष्ठ नेतृत्व जो भी उम्मीदवार तय करेगा, मैं उसका समर्थन करूंगा। हमारा लक्ष्य फिर से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की राज्य और केंद्र में सरकार बनाना है। हम इस दिशा में जो काम कर रहे हैं, अगर कोई उसका विरोध करता है, अगर कोई नाराज है और गठबंधन में कोई गड़बड़ी होती है, तो मैं अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हूं। अगर मुझे उम्मीदवारी नहीं भी दी जाती है, तो भी जिसे टिकट मिलेगा, मैं उसके लिए प्रचार करूंगा।
संजय राउत ने साधा निशाना
कल्याण-डोंबिवली में जहां इस मामले को लेकर सियासी माहौल गर्म है, वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने शिंदे पर तंज कसा है। सांसद राउत ने कहा, "यह तो होना ही था और आगे भी होता रहेगा। श्रीकांत शिंदे को कल्याण-डोंबिवली सीट शिवसेना या पार्टी के किसी काम से जुड़े बिना ही दी गई थी। श्रीकांत के लिए गोपाल लांडगे को दी गई उम्मीदवारी वापस ले ली गई थी। तब उद्धव ठाकरे ने शिंदे के बेटे को लाड़-प्यार किया। उन्हें दो बार सीट दी और वह दो बार चुने गए थे। अब उन्हें अपनी लड़ाई लड़ने दीजिए। अब बीजेपी उन्हें हर सीट के लिए रुलाये बिना छोड़ेगी नहीं।“
कैसे शुरू हुआ विवाद?
बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) भले ही राज्य में एक साथ सत्ता पर काबिज हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर दोनों पार्टियों में मतभेद है और यह कल्याण-डोंबिवली (Kalyan-Dombivli) में भी देखने को मिला है। इस तनाव का कारण बीजेपी के डोंबिवली पूर्व (Dombivli) मंडल अध्यक्ष नंदू जोशी (Nandu Joshi) के खिलाफ दायर छेड़छाड़ का मामला माना जा रहा है।
स्थानीय बीजेपी नेताओं का आरोप है कि जोशी को शिवसेना (शिंदे गुट) नेताओं ने राजनीतिक फायदे के लिए फंसाया है। स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक विरोध मार्च भी निकाला और दावा किया कि जोशी निर्दोष हैं और उन्हें सांसद शिंदे ने फंसाया है।
इस घटनाक्रम के बीच, श्रीकांत ने हाल ही में कहा कि शिवसेना उन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी जो उन्होंने 2019 में जीती थीं। इससे दोनों दलों के बीच एक बड़ा संघर्ष छिड़ गया। दोनों सत्तारूढ़ दलों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई जब कल्याण में बीजेपी द्वारा बैठक आयोजित की गई। जिसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया कि बीजेपी शिंदे गुट की शिवसेना के साथ तब तक काम नहीं करेगी और उनके द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं लेगी, जब तक कि मानपाड़ा थाने (Manpada Police Station) के वरिष्ठ निरीक्षक (इंस्पेक्टर) शेखर बागड़े (Shekhar Bagde) का ट्रांसफर नहीं किया जाता है। दरअसल नंदू जोशी के खिलाफ एफआईआर बागड़े ने ही दर्ज किया है।
बीजेपी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इंस्पेक्टर ने श्रीकांत शिंदे के कहने पर जोशी को फंसाया है। बीजेपी की बैठक कल्याण पूर्व में हुई, जिसमें राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री रवींद्र चव्हाण, कल्याण पूर्व के विधायक गणपत गायकवाड़ (Ganpat Gaikwad) और उल्हासनगर के विधायक कुमार ऐलानी (Kumar Ailani), बीजेपी के राज्य सचिव गुलाबराव करंजुले (Gulabrao Karanjule) सहित बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
Published on:
10 Jun 2023 02:04 pm

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