
पुणे में 69 बागी नेता-कार्यकर्ता भाजपा से निलंबित (Photo: IANS)
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के संपन्न होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बागियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। पुणे में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले 69 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के आदेश पर की गई है।
निकाय चुनाव के दौरान कई जगहों पर पार्टी से टिकट न मिलने के बाद कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय या अन्य दलों के समर्थन से मैदान में उतरकर आधिकारिक उम्मीदवारों को चुनौती दी थी। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और संगठन विरोधी गतिविधि मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
पार्टी की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि संबंधित नेताओं को अगले छह वर्षों तक संगठन से दूर रखा जाएगा। इस अवधि में उन्हें किसी भी प्रकार की संगठनात्मक जिम्मेदारी या पद नहीं दिया जाएगा। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासन तोड़ने वालों के प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति नहीं दिखाई जाएगी। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि कोई पदाधिकारी या कार्यकर्ता पार्टी लाइन के खिलाफ जाता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
इस फैसले के बाद पुणे की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस कार्रवाई में सबसे चर्चित नाम अमोल बालवडकर का है। बालवडकर ने टिकट न मिलने पर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का दामन थामकर चुनाव लड़ा था। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार लहू बालवडकर को शिकस्त देकर अपनी ताकत दिखाई थी। भाजपा ने अब उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाकर यह साफ कर दिया है कि बगावत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भाजपा संगठनात्मक मजबूती और अनुशासन पर खास जोर दे रही है। भाजपा के इस सख्त फैसले को संगठन में अनुशासन कायम रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इसका स्थानीय राजनीति और पार्टी की अंदरूनी रणनीति पर क्या असर पड़ता है।
Updated on:
11 Feb 2026 12:50 pm
Published on:
11 Feb 2026 12:49 pm
बड़ी खबरें
View Allमुंबई
महाराष्ट्र न्यूज़
ट्रेंडिंग
