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BMC चुनाव: मुंबई में महामुकाबला! भाजपा, उद्धव सेना और कांग्रेस के गठबंधनों में होगी कांटे की टक्कर

BMC Election 2026: नामांकन के आखिरी दिन भी दलबदल और बगावत का सिलसिला जारी रहा। कुछ उम्मीदवारों ने अंतिम घंटों में पाला बदल लिया और विरोधी दलों से टिकट हासिल कर लिया। जबकि कुछ ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए निर्दलीय पर्चा भरा।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Dec 31, 2025

BMC election Mumbai

BMC election Mumbai (Photo: IANS)

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी (BMC) के चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन जबरदस्त सियासी गहमागहमी दिखी। गठबंधन की घोषणा में हुई देरी के कारण अंतिम दिन उम्मीदवारों के बीच फॉर्म भरने की होड़ मची रही। शाम 6 बजे तक केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, जिससे साफ है कि इस बार मुंबई की सत्ता के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है।

मुंबई महानगरपालिका के 227 वार्डों में 15 जनवरी को होने वाले मतदान के लिए मंगलवार को कुल 1,668 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया। बता दें कि एक दिन पहले तक यह संख्या महज 401 थी। अब उम्मीदवारों के पास 2 जनवरी तक नाम वापस लेने का समय है, जिसके बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

मुंबई में महामुकाबला

इस बार बीएमसी चुनाव में कोई एक या दो नहीं, बल्कि कई अलग-अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिल रहे हैं। इस चुनावी रण में तीन प्रमुख गठबंधन मैदान में हैं। पहला भजपा–शिवसेना गठबंधन, दूसरा शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट)-महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)-एनसीपी (शरद पवार) और तीसरा कांग्रेस-वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) गठबंधन। इनके अलावा उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और रामदास आठवले की आरपीआई (ए) भी अपने दम पर चुनाव लड़ रही हैं।

किसे मिली कितनी सीटें?

भाजपा-शिंदे सेना: 137-90 का फार्मूला तय हुआ। शिंदे सेना ने उद्धव गुट से आए लगभग सभी 40 पूर्व पार्षदों को टिकट दिया है। जिसमें भाजपा 137 वार्डों में चुनाव लड़ रही है।

उद्धव गुट-MNS-शरद गुट: उद्धव सेना और मनसे के बीच 165-52 का समझौता हुआ है, जबकि 10 सीटें शरद पवार गुट के लिए छोड़ी गई हैं।

कांग्रेस-VBA: कांग्रेस ने 167 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) को कांग्रेस ने 60 सीटें दी है।

वहीँ, अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन से अलग होकर अकेले 94 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की पार्टी आरपीआई ने भाजपा से 12 सीटों की मांग पूरी न होने पर 38 सीटों पर 'फ्रेंडली फाइट' की तैयारी की है। आरपीआई उम्मीदवारों ने पर्चा भी भर दिया है, लेकिन भाजपा अठावले को मनाने में जुटी है।

बगावत का डर किस लिए...

संभावित बगावत से बचने के लिए भाजपा और शिवसेना जैसे बड़े दलों ने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी करने के बजाय सीधे एबी-फॉर्म बांटे। इसके बावजूद, लगभग हर पार्टी में बागियों की संख्या अच्छी-खासी है। हालांकि उनके पास 2 जनवरी तक बागी उम्मीदवारों को मनाने और नामांकन वापस करवाने का समय है। नए साल से राजनीतिक रैलियों की शुरुआत होगी, जबकि प्रचार का शोर 13 जनवरी की शाम थम जाएगा। यानी दलों के पास मतदाताओं तक पहुंचने के लिए करीब दो हफ्ते का वक्त रहेगा।

ठाकरे भाइयों के लिए अस्तित्व की लड़ाई

बड़ी पार्टियों में केवल कांग्रेस, एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) ने आधिकारिक उम्मीदवार सूची जारी की है। बाकी दलों ने बगावत से बचने के लिए सीधे उम्मीदवारों को एबी फॉर्म वितरित किए। भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने एक सप्ताह की बातचीत के बाद 137-90 का सीट बंटवारा तय किया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मंगलवार सुबह अपने सभी 90 उम्मीदवारों को एबी फॉर्म दे दिए, जिनमें उद्धव ठाकरे गुट से आए लगभग 40 पूर्व नगरसेवक शामिल हैं।

वहीं शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के बीच 165-52 का समझौता हुआ है, जिसमें 10 सीटें शरद पवार गुट की एनसीपी के लिए छोड़ी गई हैं। कांग्रेस 167 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसकी सहयोगी वंचित बहुजन आघाड़ी 60 सीटों पर मैदान में है।

खासकर मुंबई का बीएमसी चुनाव उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए साख की लड़ाई है। वहीं, एकनाथ शिंदे के लिए यह साबित करने का एक और मौका है कि असली शिवसेना उन्हीं का खेमा है।

2017 में हुए पिछले बीएमसी (BMC) चुनाव की बात करें तो उस समय शिवसेना (अविभाजित) 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा को 82 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने 31, एनसीपी (अविभाजित) ने 9, मनसे ने 7, समाजवादी पार्टी (सपा) ने 6, एमआईएम ने 2 सीटें हासिल की थीं। वहीं 5 सीटें निर्दलीयों के खाते में गई थीं।