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बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की कुर्सी खाली! 96 की जगह सिर्फ है 57 जज, 26 जजों की नियुक्ति अधर में अटकी

बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए कम से कम 26 सिफारिशें सरकार के पास विचार के विभिन्न चरणों में लंबित हैं। यहां वर्तमान में 96 जजों के मुकाबले सिर्फ 57 जज ही काम कर रहे हैं। इस साल कम से कम पांच और जजों के रिटायर होने की उम्मीद है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jul 05, 2022

16 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग के गर्भपात को बोम्बे हाईकोर्ट ने दी मंजूरी, कहा - 'रेप पीड़िता को मां बनने के लिए नहीं किया जा सकता मजबूर'

16 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग के गर्भपात को बोम्बे हाईकोर्ट ने दी मंजूरी, कहा - 'रेप पीड़िता को मां बनने के लिए नहीं किया जा सकता मजबूर'

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मौजूद बॉम्बे हाईकोर्ट में वर्तमान में जजों की भारी कमी है। ऐसा नहीं है कि इस महत्वपूर्ण कोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, लेकिन सरकार के ढीले रवैये से नए जज कोर्ट रूम तक पहुंच ही नहीं पाए। और अब हालत ऐसी है कि बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की संख्या कुल स्वीकृत के करीब आधी है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स के मुताबिक बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए कम से कम 26 सिफारिशें सरकार के पास विचार के विभिन्न चरणों में लंबित हैं। यहां वर्तमान में 96 जजों के मुकाबले सिर्फ 57 जज ही काम कर रहे हैं। इस साल कम से कम पांच और जजों के रिटायर होने की उम्मीद है। यह भी पढ़ें-Maharashtra Rains: मुंबई-पुणे समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, तटीय जिलों को अलर्ट पर रहने का निर्देश, NDRF तैनात

इसी साल 16 फरवरी को भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना (N V Ramana) की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जजों के रूप में 10 अधिवक्ताओं की नियुक्ति की सिफारिश की थी। लेकिन वह लिस्ट सरकार के पास अब तक लंबित है, इस बीच चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाले हाईकोट कॉलेजियम ने और दो लिस्ट मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजी हैं।

पिछले साल दिसंबर महीने में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 अधिवक्ताओं की पदोन्नति कर उन्हें जज के रूप में नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि यह लिस्ट अभी तक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सामने नहीं रखी गई है। इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट सात जिला कोर्ट के जजों को हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति करने पर विचार कर रहा है।

आमतौर पर कॉलेजियम और सरकार को हाईकोर्ट की तरफ से जजों की सिफारिश की लिस्ट एक साथ विचार करने और संसाधित करने के लिए भेजी जाती है। हालांकि, जब सरकार फरवरी की सिफारिशों पर ही निर्णय नहीं ले सकी, तो हाईकोर्ट ने जजों की बढ़ती कमी के मद्देनजर दो और लिस्ट भेज दी।

फरवरी में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश भी तब आई जब उसने पहले 18 अधिवक्ताओं की एक लिस्ट हाईकोर्ट को लौटा दी थी’। दरअसल यह सिफारिश बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बीपी धर्माधिकारी ने की थी। कॉलेजियम और सरकार दोनों ने आपत्ति जताई थी कि जस्टिस धर्माधिकारी ने मार्च और अप्रैल 2020 के बीच के छोटे से कार्यकाल में इन नामों की सिफारिश की थी।

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