
Bombay High Court:बॉम्बे हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन करने में देरी को गंभीरता से लेते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर 11-11 रुपये का प्रतीकात्मक जुर्माना लगाया है। यह राशि अधिकारियों को अपने वेतन से अदा करने का निर्देश दिया गया है। मामला फोर्ट इलाके में एक अवैध निर्माण को गिराने में लापरवाही से जुड़ा है। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह जुर्माना केवल एक संदेश देने के उद्देश्य से लगाया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत के आदेशों पर “तत्काल और प्रभावी” कार्रवाई हो।
यह विवाद फोर्ट स्थित कीर्ति चैंबर्स में बने एक अवैध मेजेनाइन फ्लोर से जुड़ा है। इमारत के मालिक ग्रीन ट्विग एस्टेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने किरायेदार द्वारा किए गए इस कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने के लिए अदालत का रुख किया था। हालांकि, बीएमसी को वैधानिक नोटिस न दिए जाने के आधार पर निचली अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मकान मालिक ने हाईकोर्ट में अपील की। 5 अगस्त 2024 को बीएमसी द्वारा कार्रवाई शुरू किए जाने की बात दर्ज होने के बाद अपील वापस ले ली गई। लेकिन इसके बावजूद जब अवैध ढांचे को नहीं गिराया गया, तो याचिकाकर्ताओं ने एक बार फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 23 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि 10 अगस्त 2024 को ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ पारित होने के बावजूद मामले को उसके तार्किक अंजाम तक नहीं पहुंचाया गया। आदेश में कहा गया था कि यदि किरायेदार स्वयं निर्माण नहीं हटाता है तो ‘ए’ वार्ड के सहायक नगर आयुक्त का कार्यालय इसे ध्वस्त करेगा।
हाईकोर्ट ने सहायक नगर आयुक्त जयदीप मोरे को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। 24 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि पूर्व आदेशों का पालन नहीं हुआ है। इस पर अदालत ने बीएमसी को निर्देश दिया कि मोरे के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही को लेकर उचित कार्रवाई शुरू की जाए। याचिका का निस्तारण करते हुए कोर्ट ने मामले को अनुपालन की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए 30 जनवरी 2026 तक के लिए सूचीबद्ध रखा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि सरकारी अधिकारियों की निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
9 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिवक्ता द्वारा पेश की गई मूल फाइल का अवलोकन किया और कार्रवाई में हुई देरी का पूरा क्रम दर्ज किया। कोर्ट के अनुसार, 24 दिसंबर 2025 के आदेश के प्रसारण के लिए 26 दिसंबर को रिपोर्ट तैयार हुई, 30 दिसंबर को फाइल उप नगर आयुक्त (जोन-I) चंदा जाधव के पास भेजी गई, जिन्होंने 8 जनवरी 2026 को करीब नौ दिन बाद हस्ताक्षर किए। इसके बाद अतिरिक्त नगर आयुक्त (शहर) अश्विनी जोशी ने 27 जनवरी 2026 को 19 दिन बाद फाइल पर दस्तखत किए। 28 जनवरी को नगर आयुक्त भूषण गगरानी ने तत्परता दिखाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया और 30 जनवरी 2026 को, यानी अनुपालन के लिए याचिका सूचीबद्ध होने वाले दिन ही, जयदीप मोरे को नोटिस जारी कर दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि देरी उप नगर आयुक्त (जोन-I) और अतिरिक्त नगर आयुक्त (शहर) के स्तर पर “डेस्क पर” हुई।
Updated on:
23 Feb 2026 06:19 pm
Published on:
23 Feb 2026 04:48 pm
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