
चल नहीं सकते विक्रोली की सड़कों पर
अरुण लाल
मुंबई. विक्रोली विधानसभा सीट मराठी बाहुल्य क्षेत्र है। यहां दो लाख 86 हजार 545 मतदाता हैं। इनमें एक लाख 38 हजार 504 महिलाएं और एक लाख 48 हजार 20 पुरुष मतदाता हैं। इनमें लगभग एक लाख 55 हजार मराठी मतदाता हैं। 55 हजार उत्तर भारतीय, 19 हजार छह मुसलमान, आठ हजार 510 दक्षिण भारतीय, चार हजार 596 क्रिश्चन, छह हजार 590 गुजराती हैं, 31 सौ जैन और 36 सौ 26 सिख मतदाता हैं।
यहां पर शिवसेना, राकांपा और मनसे लड़ाई में हैं। इनमें से शिवसेना और राकांपा सीधी लड़ाई में हैं। शिवसेना ने मैजूदा विधायक सुनील राऊते को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं राकांपा ने जनता में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले धनंजय सदाशिव पिसाल को उम्मीदवार बनाया है। मराठी बाहुल्य क्षेत्र होने के चलते मनसे के विनोद रामचंद्र शिंदे भी यहां पर अच्छी लड़ाई लड़ते नजर आएंगे। दो हिस्सों में बंटे लोगों की समस्याएं अपनी तरह से परेशानी में डालतीं हैं। सुर्यानगर की पहाड़ी पर रहने वाले दिनेश राजभर बताते हैं कि यहां की बड़ी पहाड़ों पर आबादी रहती है। जहां पर पानी, शौचालय की भारी समस्याएं हैं। लोगों को नीचे से ऊपर पानी लेकर जाना होता है।
पहाड़ों पर रहने वाले लाखों लोगों के लिए न तो सड़क है, न पानी, हर बार विधायक बनने से पहले लोग बड़े-बड़े वादे कर जाते हैं, पर कोई काम नहीं करता। पहाड़ों पर अवांछित तत्व अवैध निर्माण कर गरीबों को बेच देते हैं। ऐसे में बारिश के दौरान यहां पर पत्थर सरकने से कई लोग जान गंवा चुके हैं। पहाड़ों से पत्थर गिरने से बचाव के लिए सुरक्षा दीवार बनाने को हर वर्ष करोड़ों रूपए आते हैं, पर कभी यहां दीवार के नाम पर लोगों लीपापोती होती रही है। इस गोलमाल की कहीं कोई सुनवाई नहीं। विक्रोली को सीआरजेड में डालने के चलते यहां पर पुरानी इमारतों के नवीनीकरण का काम अधर में लटक गया है।
कन्नमवार नगर में रहने वाले रॉबर्ट डिसूजा कहते हैं कि रेलवे स्टेशन के आस-पास हजारों लोग खुले में शौच में जाने को मजबूर हैं। हर बार विधायक यहां पर शौचालय बनाने की बात करत हैं। पर जीतने के बाद विधायक का मिलना असंभव हो जाता है। इलाकें की सड़कों पर हॉकरों की भीड़ ऐसी है कि यहां पर चलना मुश्किल है।
विक्रोली में हजारों रिक्शे और टैक्सी हैं, पर उनके लिए कहीं कोई स्टैंड नहीं दिखता। ऐसे में एक प्रॉपर जगह के अभाव में हॉकर और रिक्सा-टैक्सी चालक यहां वहां खड़े रहते हैं। इससे वरिष्ठ नागरिकों का चलना दूभर है। पार्क साइड में रहने वाले विजय कुमार जैन बाताते हैं कि यहां पर गरीबी और अशिक्षा के चलते मादक पदार्थों की चपेट में यहां के युवक हैं, इससे क्राइम का ग्राफ भी ऊपर है। इस सीट पर 2009 में मनसे के मंगेश सांगेल एनसीपी की पल्लवी पाटिल को हारकर विधायक बने। 2014 में शिवसेना के सुनील राऊत ने मनसे के मंगेस सांगले को हाकर जीत हासिल की। इस बार फिर सुनील राऊत मैदान में हैं, शिवसेना के धनंजय पिसाल और मनसे के विनोद रामचंद्र शिंदे अच्छी लड़ाई लड़ते दिख रहे हैं।
Published on:
19 Oct 2019 04:16 pm
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