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जन्म लेते ही बच्चे ने तोड़ा दम, माता-पिता बोले- नवरात्रि चल रही, नहीं छू सकते; श्मशान कर्मियों ने दी अंतिम विदाई

Maharashtra News: छत्रपति संभाजीनगर में निजी अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने कथित तौर पर नवरात्रि की परंपरा का हवाला देकर अंतिम संस्कार से इनकार किया। इसके बाद श्मशानभूमि के कर्मचारियों ने मासूम का अंतिम संस्कार किया।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

•

Oct 14, 2026

Child dies in Chhatrapati Sambhajinagar

छत्रपति संभाजीनगर में बच्चे की मौत, नवरात्रि का हवाला देकर अंतिम संस्कार से इनकार (AI Image)

Chhatrapati Sambhajinagar News: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से झकझोर देने वाली और अमानवीय घटना सामने आई है। नवरात्रि के दौरान एक निजी अस्पताल में जन्म लेते ही मासूम बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने कथित धार्मिक परंपरा का हवाला देते हुए बच्चे का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने शव को छुआ तक नहीं। उनकी आंखों में न आंसू थे और न ही चेहरे पर कोई दुख दिखा। आखिरकार श्मशान भूमि के कर्मचारियों ने आगे आकर मानवता की मिसाल पेश करते हुए बच्चे का अंतिम संस्कार किया।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, शहर के गजानन मंदिर परिसर में स्थित एक निजी अस्पताल में एक नवजात शिशु की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने सामाजिक संस्था और श्मशान भूमि के कर्मचारियों से संपर्क किया। परिजनों ने अजब-गजब तर्क देते हुए कहा, "नवरात्रि शुरू होने के कारण हमारे यहां बच्चे और प्रसूता को छुआ नहीं जाता है, और यदि किसी की मौत हो जाए तो उसका अंतिम संस्कार भी नहीं किया जा सकता। यह सब प्रथे के अनुसार है, इसलिए हम अंतिम विधि नहीं कर सकते।" इस अंधविश्वास के चलते परिवार ने अपने ही मृत बच्चे से दूरी बना ली और उसे श्मशान भूमि के कर्मचारियों के हवाले कर दिया।

कर्मचारियों ने निभाई अंतिम विधि, माता-पिता ने नहीं बहाए एक भी आंसू

परिजनों ने बच्चे के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद श्मशानभूमि में काम करने वाले देवराज गायकवाड़ और रामेश्वर साबले अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मासूम के शव को अपनी गोद में उठाया। हद तो तब हो गई जब बच्चे के पिता ने कर्मचारियों के साथ दोपहिया वाहन पर बैठने तक से मना कर दिया और वे पीछे से अलग रिक्शा से श्मशान भूमि पहुंचे।

बच्चे का शव अस्पताल से श्मशानभूमि तक ले जाने और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी कर्मचारियों ने संभाली। उन्होंने खुद गड्ढा खोदकर बच्चे को दफनाया। इस दौरान पिता कुछ दूरी पर ही खड़े रहे। बाद में उन्होंने बच्चे के ऊपर थोड़ा दूध छिड़का और वहां से चले गए।

नवरात्रि को देशभर में श्रद्धा और भक्ति के पर्व के रूप में मनाया जाता है। ऐसे समय में बच्चे के अंतिम संस्कार से परिजनों के कथित इनकार की घटना ने एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधश्रद्धा और संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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