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Shiv Sena: उगता सूरज और त्रिशूल पर शिंदे गुट ने भी ठोका दावा, अब चुनाव चिन्ह को लेकर मची घमासान, जानें अपडेट

Uddhav Thackeray vs Eknath Shinde: केवल चिन्ह ही नहीं बल्कि शिंदे गुट और ठाकरे गुट के बीच नाम को लेकर भी टकराव हो रहा रहा। दोनों गुटों अपना अस्थाई नाम ‘शिवसेना- बालासाहेब ठाकरे’ रखना चाहते है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Oct 10, 2022

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एकनाथ शिंदे की शिवसेना का 'मिशन मुंबई' तैयार!

Shiv Sena Electon Symbol: शिवसेना के दोनों धड़ों एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (Shinde vs Thackeray) के बीच तनातनी बढ़ गई है। दोनों खेमों ने चुनाव आयोग (Election Commission) को अपनी-अपनी पंसद के वैकल्पिक नाम और चिन्ह बताये है। ऐसा कहा जाता रहा है कि शिंदे गुट ने पहले गदा, तलवार और तुरही का विकल्प अपने नए चुनाव चिन्ह के तौर पर चुनाव आयोग के सामने प्रस्तुत किए थे। हालांकि अब जानकारी सामने आई है कि शिंदे गुट ने ठाकरे समूह की तरह ही उगता सूरज और त्रिशूल के निशान पर दावा किया है। इस वजह अब दोनों खेमों में घमासान बढ़ने की उम्मीद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे समूह ने चुनाव चिन्ह के लिए तीन विकल्प चुने हैं। ठाकरे गुट त्रिशूल, उगता सूरज और मशाल को आगामी अंधेरी पूर्व उपचुनाव में अपना निशान बनाना चाहता है। सूत्रों के मुताबिक इसमें से उगते सूरज और त्रिशूल के प्रतीकों पर शिंदे गुट ने भी दावा किया है। मुंबई के अंधेरी उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 14 अक्टूबर है। यह भी पढ़े-Shiv Sena: उद्धव गुट के बिगड़े बोल, कहा- भारत के 5 हजार वर्षों के इतिहास में एकनाथ शिंदे जैसा कोई दानव नहीं

खबर है कि केवल चिन्ह ही नहीं बल्कि शिंदे गुट और ठाकरे गुट के बीच नाम को लेकर भी टकराव हो रहा रहा। दोनों गुटों अपना अस्थाई नाम ‘शिवसेना- बालासाहेब ठाकरे’ रखना चाहते है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रीय चुनाव आयोग किसको कौन सा चुनाव चिह्न व नाम देता है।

गौरतलब हो कि शिवसेना में फूट के बाद उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट ने पार्टी के निशान ‘धनुष और बाण’ और पार्टी पर दावा किया है। इसके चलते शनिवार को चुनाव आयोग ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया और शिवसेना के नाम के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी। इसके बाद अब दोनों गुटों को अलग-अलग वैकल्पिक नाम व निशान का उपयोग करना होगा। जिसका आवंटन निर्वाचन आयोग द्वारा किया जायेगा। इस संबंध में आयोग ने शिवसेना के दोनों धड़ों से उनकी पसंद का नाम और चुनाव चिह्न का विकल्प बताने के लिए कहा था।