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अब सड़कें भी गुनगुनाएंगी! कार चलाओ और ‘जय हो’ सुनो…मुंबई कोस्टल रोड पर भारत का पहला म्यूज़िकल हाईवे

Mumbai Coastal Road: मुंबई की कोस्टल रोड पर अब ड्राइविंग सिर्फ सफर नहीं, बल्कि एक अनोखा अनुभव बन गई है। सुरंग से बाहर निकलते ही 60 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर सड़क से खुद एक जानी-पहचानी धुन सुनाई देने लगती है, जो टायरों की गूंज से पैदा होती है, न कि कार के म्यूज़िक सिस्टम से।

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मुंबई

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Imran Ansari

Feb 12, 2026

India first musical highway on Mumbai Coastal Road

Mumbai Coastal Road:मुंबई की कोस्टल रोड पर सफर कर रहे वाहन चालकों के लिए अब ड्राइविंग का अनुभव पहले से बिल्कुल अलग हो गया है। जैसे ही कार धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज मार्ग (मुंबई कोस्टल रोड) पर सुरंग से बाहर निकलती है और गति 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहती है, टायरों की हल्की गूंज धीरे-धीरे एक जानी-पहचानी धुन में बदल जाती है। यह आवाज कार के म्यूजिक सिस्टम से नहीं, बल्कि सड़क से आती है।

11 फरवरी 2026 को भारत को अपनी पहली म्यूजिकलरोड मिली। यह 500 मीटर लंबा विशेष सड़क खंड नरीमन पॉइंट से वर्ली की ओर जाने वाली लेन पर, कोस्टल टनल से बाहर निकलते ही बनाया गया है। इस सड़क पर चलने पर ऑस्कर विजेता फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर का मशहूर गीत ‘जय हो’ सुनाई देता है।

कैसे काम करती है म्यूजिकल रोड

इस अनोखी सड़क को खास तकनीक से तैयार किया गया है। इसमें सामान्य सड़क की तरह नहीं, बल्कि एस्फाल्ट में तय गहराई और दूरी पर विशेष खांचे (रम्बल स्ट्रिप्स) काटे गए हैं। जब वाहन तय गति से इन खांचों के ऊपर से गुजरते हैं, तो टायरों और सड़क के घर्षण से कंपन पैदा होता है। यही कंपन मिलकर संगीत की धुन बनाता है। अगर वाहन की रफ्तार कम होती है तो धुन बिखरी-बिखरी लगती है और ज्यादा तेज होने पर आवाज़ बिगड़ जाती है। सही स्पीड पर चलने से ही पूरा गीत साफ सुनाई देता है। सड़क के भीतर लगाए गए साइनबोर्ड 500 मीटर, 100 मीटर और 60 मीटर पहले ही चालकों को इस म्यूजिकल सेक्शन की जानकारी देते हैं और सही गति बनाए रखने की सलाह देते हैं।

हंगरी की तकनीक से तैयार

अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना को हंगरी की तकनीक और तकनीकी विशेषज्ञता से तैयार किया गया है। हंगरी लंबे समय से ऐसी ‘मेलोडी रोड्स’ पर प्रयोग करता रहा है, जहां सड़क सुरक्षा और रचनात्मकता को एक साथ जोड़ा जाता है। मुंबई की यह सड़क भी उसी अवधारणा पर आधारित है, जहां ड्राइवर सतर्क भी रहते हैं और सफर का आनंद भी लेते हैं।

दुनिया में कहां-कहां हैं म्यूज़िकल रोड

हालांकि भारत के लिए यह पहली म्यूजिकल रोड है, लेकिन दुनिया में इसका इतिहास पुराना है। 1995 में डेनमार्क में पहली बार ‘एस्फाल्टोफोन’ नाम की म्यूजिकल रोड बनाई गई थी। इसके बाद 2007 में जापान में यह तकनीक लोकप्रिय हुई और वहां कई मेलोडी रोड्स बनाई गईं। आज हंगरी, जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी ऐसी सड़कें मौजूद हैं। कहीं लोकधुनें बजती हैं, तो कहीं बीथोवन की Ode to Joy जैसी क्लासिकल धुनें। इन सड़कों का उद्देश्य न सिर्फ ड्राइविंग को मज़ेदार बनाना है, बल्कि चालकों को सही गति बनाए रखने और सतर्क रहने के लिए प्रेरित करना भी है।

मुंबई में ड्राइविंग का नया अनुभव

मुंबई की यह म्यूज़िकल रोड न सिर्फ तकनीक का अनोखा उदाहरण है, बल्कि यह दिखाती है कि शहरों में बुनियादी ढांचे को रचनात्मक तरीकों से कैसे और बेहतर बनाया जा सकता है। अब कोस्टल रोड पर सफर सिर्फ तेज और सुगम ही नहीं, बल्कि सुरों से भरा भी हो गया है।