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Pune Porsche Case: 300 शब्दों का निबंध लिखने की शर्त पर बेल देना पड़ा भारी! किशोर न्याय बोर्ड के 2 मेंबर बर्खास्त

Pune Porsche Accident : पुणे पुलिस के मुताबिक, तेज रफ्तार पोर्शे कार से दो लोगों को रौंदने वाला नाबालिग आरोपी शराब के नशे में था और हादसे के बाद ड्राइवर बदलने की भी कोशिश की थी।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Oct 10, 2024

Pune Porsche car Accident

Pune Porsche Car Accident Case : महाराष्ट्र के पुणे शहर में लक्जरी कार ‘पोर्शे’ से 19 मई को दो युवा इंजीनियरों की जान लेने वाले नाबालिग आरोपी को निबंध लिखने जैसे मामूली शर्तों पर जमानत देने वाले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के दो सदस्यों को बर्खास्त कर दिया गया है। नाबालिग आरोपी फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली जमानत पर जेल से बाहर है।

महाराष्ट्र सरकार ने ‘शक्ति के दुरुपयोग’ के आरोप में किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) पुणे के दो राज्य-नियुक्त सदस्यों को बर्खास्त कर दिया है। विवादास्पद जमानत शर्तों के साथ पुणे पोर्श कार दुर्घटना मामले में किशोर आरोपी को जमानत देने के बाद दोनों सदस्यों की जांच चल रही है।

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मालूम हो कि पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई को पोर्शे कार से हुए हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियरो अनीस अहुदिया (24) और अश्विनी कोस्टा (24) की मौत हुई थी। दोनों मध्य प्रदेश के मूल निवासी थे और काम के सिलसिले में पुणे में रह रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, हादसे के समय रिएल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल का नाबालिग बेटा नशे की हालत में लग्जरी कार चला रहा था। पुलिस ने दुर्घटना के बाद 17 साल 8 महीने के आरोपी को हिरासत में लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया, लेकिन उसे मामूली शर्तों पर जमानत मिल गई। इसका भारी विरोध हुआ तो पुलिस और सरकार एक्शन मोड में आ गई। जिसके बाद नाबालिग आरोपी को बोर्ड ने सुधार गृह भेज दिया।

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इन शर्तों पर दी थी बेल

पुलिस ने आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया था, जहां उसे जमानत मिल गई। बोर्ड ने उसे आरटीओ जाकर यातायात नियम पढ़ने का निर्देश दिया था। साथ ही आदेश में कहा था कि सीसीएल (कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चा) सड़क हादसे और उसका समाधान विषय पर 300 शब्दों का निबंध लिखेगा।

इसके साथ ही आरोपी किशोर को 15 दिनों के लिए पुणे की येरवडा ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने, एक्सीडेंट पर निबंध लिखने, शराब छोड़ने में मदद के लिए संबंधित डॉक्टर से इलाज करवाने के अलावा मनोचिकित्सीय परामर्श लेने का भी निर्देश दिया गया।