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Maha news corona: अजमेर से चली, जाना था उदयपुर पहुच गई नांदेड़

भरी दुपहरी में नांदेड़ हैदराबाद( Nanded ) रोड पर एक महिला नंगे पैर चल रही है। उन्होंने तुरंत महिला (woman) को हिरासत में ले लिया और नांदेड़ में पुलिस कंट्रोल रूम (police control room) सूचित किया। बाद में उसे जिला कलेक्टर ने इस महिला के रहने और खाने की सुविधाओं उपलब्ध कराई गई । अधिकारियों ने महिला के रिश्तेदारों से संपर्क कर सूचना देने का प्रयास किया है । लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद उसे उसके रिश्तेदारों को सौंप दिया जाएगा।

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Maha news corona: अजमेर से चली, जाना था उदयपुर पहुच गई नांदेड़

Maha news corona: अजमेर से चली, जाना था उदयपुर पहुच गई नांदेड़

मुम्बई । कोरोना वायरस के प्रभाव को रोकने के लिए लॉकडाउन शुरू है । इस बीच कई लोग जहाँ तहां अटक गए हैं । ऐसे ही उदयपुर की एक 55 वर्षीय उम्र दराज महिला भी लॉकडाउन के चलते नान्देड़ में फंस गई है । इस महिला को अजमेर से उदयपुर जान था लेकिन गलती से वह महाराष्ट्र के नांदेड़ जिला प्रशासन के क्षेत्र में पहुच गई । सेवा में जूट प्रशासन के कर्मचारियों एवं कर्मचारियों की संवेदनशीलता और कर्तव्यबद्धता के चलते उस महिला को रहने और खाने की सुव्यवस्था हो सकी है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद वह आपने वतन को जा सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लॉक डाउन की घोषणा के साथ ही नान्देड़ में पुलिस चेक पोस्ट पर तैनात थी। नांदेड़ जिले की सभी महत्वपूर्ण सड़कें पुलिस और जिला प्रशासन की निगरानी में थी। ड्यूटी पर तैनात कुंतूर पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक शेख ने देखा कि भरी दुपहरी में नांदेड़ हैदराबाद रोड पर एक महिला नंगे पैर चल रही है। उन्होंने तुरंत महिला को हिरासत में ले लिया और नांदेड़ में पुलिस कंट्रोल रूम सूचित किया। बाद में उसे जिला कलेक्टर ने इस महिला के रहने और खाने की सुविधाओं उपलब्ध कराई गई ।

इस मामले में सजगता दिखाते हुए अतिरिक्त जिलाधिकारी खुशाल सिंह परदेशी ने क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर थोंबरे को इस महिला की देखभाल करने की जिम्मेदारी सौंपी।

जिला जनसंपर्क अधिकारी दिलीप शिंदे ने बताया कि राजस्थान के उदयपुर में सबरुन निसाबेगम नाम की 55 वर्षीय महिला को नान्देड़ के नायगांव के एक शिविर में रखा गया है । यह महिला गलती से नांदेड़ आ गई है। दरअसल सबरुन निशाबेगम उदयपुर से अजमेर देखने गई थी। अजमेर शरीफ के दरगाह पर चादर चढ़ाने , लेकिन जब वह लौट रही थी । तब उसने गलती से नांदेड़ की तरफ आने वाली एक ट्रेन में सवार हो गई और सीधे नांदेड़ आ गई। उम्र दर्ज और काम पढ़े लिखे होने की वजह से उसे अब कुछ समझ मे भी नही आ रहा था । वह यह तक नहीं कह सकती थी कि वह नांदेड़ कैसे पहुंची, लेकिन प्रशासन उसके पास मौजूद दस्तावेजों और पहचान पत्रों के आधार पर उसकी पहचान करने में सफल रहा । अधिकारियों ने महिला के रिश्तेदारों से संपर्क कर सूचना देने का प्रयास किया है । लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद उसे उसके रिश्तेदारों को सौंप दिया जाएगा।

प्रशासन जिले में अन्य जिलों एवं राज्यों के मजदूरों, श्रमिकों और नागरिकों को आवास और भोजन प्रदान करने में जुट है । जहां भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं सूचना मिलते ही साइट पर पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। कई ठिकानों पर दानदाताओं और सामाजिक संगठनों की मदद मिल रही है। लॉकडाउन के दौरान तक उक्त महिला के साथ कई लोगों को आश्रय मिला है, लेकिन बाद में वह सब अपने घर जाएंगे।