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महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री बनने के बाद एकनाथ शिंदे पर पहली बार लगा घोटाले का आरोप, जानें क्या है मामला

NIT Land Scam Eknath Shinde: शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पटोले, विधानसभा में विपक्ष के नेता अजित पवार और अंबादास दानवे जैसे शीर्ष नेता और अन्य ने शिंदे को सीएम पद छोड़ने के लिए कहा।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Dec 20, 2022

Eknath-Shinde

Eknath Shinde

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधानमंडल में मंगलवार को विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है। एमवीए नेताओं ने शिंदे पर भूमि घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया है। यह भूखंड नागपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (NIT) के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पटोले, विधानसभा में विपक्ष के नेता अजित पवार और अंबादास दानवे जैसे शीर्ष नेता और अन्य ने शिंदे को सीएम पद छोड़ने के लिए कहा। विपक्ष का आरोप है कि जब एकनाथ शिंदे तत्कालीन एमवीए सरकार में शहरी विकास मंत्री थे, तब उन्होंने नागपुर में लगभग 100 करोड़ रुपये की जमीन दी थी। तब इसे गरीबों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के लिए दिया गया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर शिंदे ने इस जमीन को कुछ बिल्डरों को बमुश्किल 2 करोड़ रुपये के औने-पौने दर सौंप दिया। इसको लेकर आज महाराष्ट्र विधानसभा में गरमागरम बहस भी हुई। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र ग्राम पंचायत चुनाव में जीत से गदगद हुए एकनाथ शिंदे, कहा- हम पर उंगली उठाने वालों को जनता ने दिया जवाब

विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विधानसभा में स्पष्ट कहा कि शहरी विकास मंत्री या मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने नागपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट मामले में कोई गलत काम नहीं किया है। विपक्ष पर हमला बोलते हुए शिंदे ने कहा, “एकनाथ शिंदे आपकी तरह मुफ्त में 350 करोड़ नहीं देगा।“ शिंदे ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने इस मामले का उठाया है, उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है।

इससे पहले पटोले ने कहा कि मुख्यमंत्री शिंदे को एक मिनट के लिए भी पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत पद छोड़ देना चाहिए। जब इतना बड़ा जमीन घोटाला है तो वह पद पर कैसे रह सकते हैं? दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिंदे के उस आदेश पर सवाल उठाया है, जब वह तत्कालीन एमवीए शासन में मंत्री थे और उन्होंने नागपुर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को अप्रैल 2021 में लगभग पांच एकड़ जमीन 16 निजी बिल्डरों को सौंपने का निर्देश दिया था। हालांकि यह मामला विचाराधीन था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी को होगी।