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महाराष्ट्र में कब थमेगा अन्नदाताओं के जान देने का सिलसिला! मराठवाड़ा के कई जिलों में भारी बारिश के चलते जहां किसान काफी संकट में हैं, वहीं एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मराठवाड़ा में पिछले सात महीनों यानि 206 दिनों में 515 किसानों ने आत्महत्या का कदम उठाया है। जिनमें से सर्वाधिक 153 किसान बीड जिले के हैं। यानी मराठवाड़ा में हर दिन दो से अधिक किसान अपनी जान दे रहे हैं।
इस साल जनवरी से और 25 जुलाई तक कुल 515 किसानों ने आत्महत्या की है। जिसमें औरंगाबाद जिले के 83 किसान, जालना के 60, परभणी के 42, हिंगोली के 17, नांदेड के 64, बीड के 153, लातूर के 33, उस्मानाबाद के 63 किसानों ने पिछले सात महीनों में आत्महत्या की है। महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 'आत्महत्या मुक्त महाराष्ट्र' के नारे के साथ किसानों के हित में काम करने की बात कही थी। यह भी पढ़ें: Trans Couple Marriage: महाराष्ट्र में समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए पहली बार ट्रांस कपल ने रचाई शादी, देखें वीडियो
बता दें कि जुलाई महीने में हुई भारी बारिश ने मराठवाड़ा के 3 हजार 640 गांवों को प्रभावित किया है। वहीं, दूसरी तरफ भारी बारिश से 54 लाख हेक्टेयर में लगी फसल बर्बाद हो गया है। प्रशासन भले ही डेढ़ लाख हेक्टेयर का पंचनामा कर चुका हो, लेकिन अभी भी ढाई लाख हेक्टेयर का पंचनामा लंबित है। इस भारी बारिश से मराठवाड़ा में कुल 6 लाख 21 हजार किसान प्रभावित हुए हैं।
मराठवाड़ा के किसान प्रकृति की मार से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जबकि सरकारी मदद भी उन तक जरूरत के मुताबिक नहीं पहुंच रही है। इसलिए राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र में पिछले 24 दिनों के दौरान कर्ज और कम उपज से परेशान 54 किसानों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है।
महाराष्ट्र को किसान आत्महत्या मुक्त बनाने का संकल्प लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि किसानों को कोई समस्या न हो इसलिए सरकार कई बड़े फैसले ले रहे हैं। किसानों को आत्महत्या करने से रोकने का प्रयास भी जारी हैं। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसानों को उनकी कृषि उपज का अच्छा मूल्य मिल सकें। इतना ही नहीं आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर किसानों की जिंदगी जल्द से जल्द बदलना चाहिए।
Updated on:
27 Jul 2022 06:39 pm
Published on:
27 Jul 2022 06:27 pm
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