
अबू आजमी और देवेंद्र फडणवीस (Photo: x/File)
महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम चरण में राज्य सरकार ने धर्मांतरण (Maharashtra Anti-Conversion Bill 2026) से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में पेश किया। राज्य में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण की बढ़ती शिकायतों के बीच लाए गए ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक’ पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। जहां सत्ता पक्ष इसे जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए जरूरी कानून बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने इस विधेयक को लेकर कहा कि इसका उद्देश्य किसी भी धर्म के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि जबरन या प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है। वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अबू आजमी (Abu Azmi) ने इस कानून का विरोध करते हुए कहा कि 18 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति अपनी इच्छा से विवाह और धर्म परिवर्तन करने का अधिकार रखता है।
राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य कथित ‘लव जिहाद’ और दबाव या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता हर नागरिक का अधिकार है और यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे पूरा अधिकार है। लेकिन अगर किसी को डर, दबाव या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान इस विधेयक में किया गया है।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में लड़कियों को बहला-फुसलाकर भगाने और बाद में छोड़ देने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं और उनके बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए कानून के जरिए समाधान लाने की कोशिश की गई है।
सीएम फडणवीस ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विरोधी दल केवल वोट बैंक की राजनीति के कारण इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष इस विधेयक को ध्यान से पढ़ेगा तो उसे समझ में आएगा कि इसमें किसी भी धर्म के खिलाफ कोई प्रावधान नहीं है। यह कानून केवल कुप्रथाओं और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए बनाया जा रहा है।
वहीं सपा विधायक अबू आजमी ने इस विधेयक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भाजपा नीत महायुति सरकार मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए यह कानून ला रही है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से विवाह कर सकता है और धर्म परिवर्तन भी कर सकता है। ऐसे में इस तरह का कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि देश के कई राज्यों में इसी तरह के कानून पहले से लागू हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि तमिलनाडु जैसे राज्य में भी इस प्रकार का कानून मौजूद है, जहां भाजपा की सरकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल तुष्टिकरण और वोटों की राजनीति के कारण इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध कर रहा है।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे केवल राजनीतिक कारणों से विरोध करने के बजाय पहले विधेयक को विस्तार से पढ़ें और उसके बाद अपनी राय रखें।
अब यह विधेयक विधानसभा में चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया से गुजरेगा और इसके पारित होने या इसमें संशोधन को लेकर अंतिम फैसला सदन में ही होगा।
Updated on:
16 Mar 2026 06:32 pm
Published on:
16 Mar 2026 05:48 pm
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