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महाराष्ट्र के 14 गांवों ने की तेलंगाना में विलय करने की मांग, ग्रामीण बोले- वहां मिल रही पेंशन और मुफ्त राशन

Maharashtra Border Issue: ग्रामीणों का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार से ज्यादा तेलंगाना सरकार उन्हें अधिक फायदे दे रही है। ऐसे में महाराष्ट्र की शिंदे-फडणवीस सरकार की चिंता बढ़ गई है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Dec 14, 2022

Eknath Shinde and Devendra Fadnavis

एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस

Maharashtra Border Dispute: महाराष्ट्र में सीमा विवाद गहराता जा रहा है। राज्य के दर्जनों सीमावर्ती गांवों ने पड़ोसी राज्यों कर्नाटक, मध्य प्रदेश और गुजरात में विलय करने की मांग की है। इस लिस्ट में अब तेलंगाना से सटे 14 गांवों का भी नाम जुड़ गया है। महाराष्ट्र-तेलंगाना (Telangana) सीमा पर स्थित महाराजगुडा (Maharajguda), नाके वाडा (Nake Wada) सहित 14 गाँवों के लोगों ने तेलंगाना में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार से ज्यादा तेलंगाना सरकार उन्हें अधिक फायदे दे रही है। ऐसे में महाराष्ट्र की शिंदे-फडणवीस सरकार की चिंता बढ़ गई है। यह भी पढ़े-70 गांवों ने दी महाराष्ट्र से अलग होने की धमकी, हरकत में आई शिंदे-फडणवीस सरकार!

नाके वाडा के एक स्थानीय निवासी ने कहा "लोग तेलंगाना में विलय चाहते हैं क्योंकि उन्हें महाराष्ट्र सरकार की तुलना में तेलंगाना सरकार से कई लाभ मिल रहे हैं। तेलंगाना सरकार यहां के वरिष्ठ नागरिकों को 1,000 रुपये की पेंशन, 10 किलो राशन और कई अन्य लाभ देती है।“

नाके वाडा गांव के उप सरपंच सुधाकर जाधव (Sudhakar Jadhav) ने कहा "लोगों को तेलंगाना सरकार से लाभ मिल रहा है। मैं महाराष्ट्र सरकार से अपील करता हूं कि यहां के लोगों को और योजनाओं का लाभ दिया जाये।"

वहीँ, राजुरा विधानसभा क्षेत्र (Rajura Assembly Constituency) के विधायक सुभाष धोटे (Subhash Dhote) ने कहा “14 गांवों के 70-80% लोग महाराष्ट्र के साथ रहना चाहते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो तेलंगाना में विलय करना चाहते हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। यहां कृषि भूमि का मालिकाना हक देने का काम भी शुरू हो चुका है।”

इससे पहले राज्य के नासिक, सोलापुर और बुलढाणा जिले के कम से कम 70 गांवों ने महाराष्ट्र से अलग होकर अपने नजदीकी राज्य से जुड़ने की इच्छा जताई थी। अकेले नासिक के सुरगना तालुका के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित कम से कम 55 गांवों के लोगों ने उनके मुद्दों का समाधान करने या फिर उनका विलय गुजरात में करने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि अधिकतर ग्रामीणों का आरोप है कि राज्य सरकार और प्रशासन उनकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिस वजह से वह लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे है। वहीँ, गुजरात में विलय की धमकी देने के बाद मंत्री दादा भुसे ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास का आश्वासन दिया है।