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महाराष्ट्र: मंत्रियों के बेलगावी दौरे को लेकर डिप्टी सीएम फडणवीस ने दिया बड़ा बयान, कहीं यह बात

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया हैं। डिप्टी सीएम फडणवीस ने कहा कि देश में किसी को भी कहीं जाने से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन चूंकि यहां सीमा विवाद की स्थिति है इसलिए हम किसी भी कानूनी पेचीदगियों से बचना चाहते हैं।
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मुंबई

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Siddharth Raghuvanshi

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Updated: 5 Dec 2022, 6:08 PM IST

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Basavaraj Bommai And Devendra Fadnavis

सोमवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा कि कर्नाटक के साथ राज्य के सीमा विवाद (Border Dispute) के समन्वय के लिए नियुक्त मंत्रियों को विवादित क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए या नहीं, इस पर अंतिम फैसला सीएम एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) लेंगे। महाराष्ट्र ने चंद्रकांत पाटिल (Chandrakant Patil) और शंभूराज देसाई (Shambhuraj Desai) को सीमा विवाद के लिए समन्वय मंत्री नियुक्त किया है, दोनों नेता 6 दिसंबर को बेलगावी जाने वाले है जिसका कर्नाटक सरकार की तरफ से विरोध हो रहा है।

मीडिया से बातचीत में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि दोनों नेताओं, जिन्होंने पहले विवादित क्षेत्रों का दौरा करने का एलान किया था, उन्हें वहां के स्थानीय नेताओं ने बाबासाहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि के मौके पर आमंत्रित किया है, हमारी राय है कि विवादित क्षेत्रों में इस तरह का दौरा करते किसी भी कानूनी अड़चनों से बचा जाए, हालांकि फिर भी इस पर अंतिम फैसला सीएम एकनाथ शिंदे ही लेंगे। बता दें कि साल 1960 में महाराष्ट्र की स्थापना के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद है और यह विवाद तभी से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यह भी पढ़े: गुजरात इलेक्शन रिजल्ट से पहले संजय राउत ने ईवीएम पर खड़े किए सवाल, पीएम मोदी पर भी बोला हमला

बता दें कि डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हम एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं इसलिए किसी को भी कहीं जाने से रोका नहीं जा सकता है। लेकिन यहां सीमा विवाद की स्थिति है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है इसलिए हम इस मामले में किसी भी कानूनी पेचीदगियों से बचना चाहते हैं लेकिन यदि वे चाहें तो उन्हें विवादित क्षेत्र का दौरा करने से कोई रोक नहीं सकता। डिप्टी आज इससे पहले कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने कहा था कि वह महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से कहेंगे कि वे अपने मंत्रियों को बेलगावी न भेजें क्योंकि इस स्थिति में उनके दौरे से यहां कानून-व्यवस्था में गड़बड़ी हो सकती है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र-कर्नाटक के बीच साल 1957 में भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद सीमा विवाद शुरू हुआ। महाराष्ट्र तभी से बेलगावी पर अपना दावा करता है, महाराष्ट्र का कहना है कि यह तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी का भाग था और यहां मराठी भाषी लोग भी अच्छी खासी संख्या में रहते हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक 814 मराठी भाषी गांवों पर भी दावा करता है। जबकि कर्नाटक साल 1967 में महाजन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक भाषा के आधार पर हुए सीमांकन को ही अंतिम बंटवारा मानता है।

बता दें कि चंद्रकांत पाटिल बीजेपी के दिग्गज नेता हैं, जबकि शंभुराज देसाई शिंदे गुट के सदस्य हैं। ये दोनों मंत्री पश्चिमी महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। महाराष्ट्र, 1960 में अपनी स्थापना के बाद से कर्नाटक के साथ बेलगाम जिले और 80 अन्य मराठी भाषी गांवों को लेकर विवाद में उलझा हुआ है। बेलगाम और ये सभी इलाके कर्नाटक में हैं।

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