
सनी देओल की बंटवारा 1947 की फोटो। (फोटो सोर्स: IMDb)
Batwara 1947 Actor Sunny Deol: भारत के इतिहास का एक दर्दनाक अध्याय है ‘1947 में बंटवारा’। एक ऐसी त्रासदी जिसने सिर्फ सरहदें नहीं खींचीं, बल्कि लाखों परिवारों, रिश्तों और जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल दिया। फिल्म ‘बंटवारा 1947’ इसी दर्द, बिछड़न, संघर्ष और इंसानियत की कहानी को बड़े पर्दे पर जीवंत करने का एक प्रयास है। बीती 28 जुलाई को सनी देओल की मोस्ट अवेटेड फिल्म का ट्रेलर रेलेज हुआ है।
आज के दौर में सबसे बड़ा बंटवारा झूठ को सच और सच को झूठ साबित करने का हो रहा है। हकीकत कुछ और होती है, लेकिन उसे कुछ और बना दिया जाता है। हर कोई शॉर्टकट चाहता है, जबकि जिंदगी का असली आनंद उसके सफर में होता है। यह कहना है फिल्म एक्टर सनी देओल का। फिल्म प्रमोशन के लिए वो बुधवार (29 जुलाई) को फिल्म डायरेक्टर राजकुमार संतोषी, एक्टर करण देओल के साथ पत्रिका ऑफिस पहुंचे, जहां उन्होंने पत्रिका, पत्रिका डिजिटल और एफएम तडक़ा के साथ विशेष बातचीत की। स्टारकास्ट ने कहा कि फिल्म बंटवारे से जुड़े कई पहलुओं से रूबरू कराएगी। 1947 का विभाजन इतिहास का ऐसा जख्म है, जिसकी टीस आज भी महसूस की जाती है। यह फिल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
दर्शक फिल्म देखकर अपने साथ क्या लेकर जाएंगे?
सनी देओल: इस फिल्म में मां का संघर्ष, दर्द और त्याग बहुत गहराई से दिखाया गया है।मुझे लगता है कि फिल्म देखने के बाद बहुत से लोग घर जाकर अपनी मां को गले लगा लेंगे।
आज की जनरेशन को इस फिल्म से क्या सीखना चाहिए?
इस सवाल के जवाब में राजकुमार संतोषी कहते हैं कि फिल्म का मैसेज है कि ‘मां की सेवा से अच्छा कोई कर्म नहीं और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं।’ यह बात यंगस्टर्स को समझनी चाहिए। अच्छा इंसान बनना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसकी प्रेरणा और आशीर्वाद मां से मिलता है। आज के युवाओं को सबसे पहले अच्छा इंसान बनने की सीख लेनी चाहिए। मां के संस्कार और मानवता ही समाज को मजबूत बनाते हैं।
सनी देओल ने इस सवाल के जवाब में कहा, 'हर जनरेशन की नींव उसके पेरेंट्स होते हैं। बच्चों को जिस तरह के संस्कार और मार्गदर्शन मिलता है, वैसी ही उनकी सोच बनती है। बच्चों को सही दिशा और संस्कार देना पेरेंट्स की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
फिल्म में काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जब करण देओल से पूछा गया कि फिल्म में काम करने का अनुभव कैसा रहा, तो उन्होंने कहा, 'मेरे लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सीखने का मौका था। पिता सनी देओल के साथ काम करना मेरे कॅरियर के सबसे यादगार अनुभवों में रहेगा। उनसे हर दिन कुछ नया सीखने को मिला। वो हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करते हैं।
सनी देओल: तारा सिंह कहेगा कि मैं तुम्हें बिना वीजा के बॉर्डर पार करा देता हूं। ‘बंटवारा 1947’ का किरदार कहेगा कि ‘मां से बढकऱ इस दुनिया में कुछ नहीं है।
क्या घर में भी ‘ढाई किलो के हाथ’ का असर रहता है?
इस सवाल के जवाब में करण देओल कहते हैं, 'पिता को घर पर ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ती, उनके इशारों से ही बात समझ आ जाती है।'
‘गदर-2’ के बाद आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आया?
सनी देओल: मेरे अंदर का विश्वास कभी खत्म नहीं हुआ था, बस सही मौके का इंतजार था। ‘गदर-2’ ने मुझे नई शुरुआत दी। इसके बाद लोगों का प्यार और काम करने की ऊर्जा दोनों बढ़ गए।
आज के युवाओं को क्या संदेश देंगे?
सनी देओल: मैं हमेशा बच्चों से कहता हूं कि वही काम करो, जो तुम्हें अच्छा लगता है। मेहनत कभी मत छोड़ो, खुद पर विश्वास रखो और ऐसा कोई काम मत करो, जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे।
सुपरस्टार धर्मेंद्र देओल को याद करते हुए सनी देओल ने कहा कि मेरे लिए मेरे पापा धर्मेन्द्र ही सबसे बड़े हीरो हैं। पिता धर्मेंद्र जी के साथ कई बार जयपुर आया हूं। जयपुर मेरे दिल के बहुत करीब है। यहां की खूबसूरती हमेशा आकर्षित करती है। मैं उनसे बहुत डरता था। मेरे बच्चे भी मेरा सम्मान करते हैं और मुझसे डरते हैं।
वहीं, फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी ने कहा कि कैमरे के सामने सनी जितने दमदार डायलॉग बोलते हैं, पिता के सामने आते ही धीमी आवाज में ‘जी पापा’ कहते थे। ‘घायल’ के समय जयपुर आया था। उसी दौरान धर्मेंद्र से मुलाकात हुई थी। उन्होंने घायल की कहानी सुनकर उसको प्रोड्यूस किया। फिल्म हमारे लिए यादगार साबित हुई। जयपुर से शुरुआत हमारे लिए शुभ रही।
Updated on:
30 Jul 2026 06:19 pm
Published on:
30 Jul 2026 06:19 pm
