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अब बच्चों की नींद होगी पूरी… महाराष्ट्र में बदला गया स्कूल का समय, शिक्षा मंत्री ने किया ऐलान

School Timing: विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की कमी से बच्चों के मस्तिष्क के विकास पर असर पड़ता है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Dec 19, 2023

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महाराष्ट्र में बदलेगी स्कूल की टाइमिंग

Maharashtra Schools Timing Change: महाराष्ट्र में लंबे समय से छोटे बच्चों की कक्षाओं का समय बदलने की मांग हो रही है। राज्य में आमतौर पर सुबह में प्राथमिक विद्यालय की कक्षाएं और दोपहर में माध्यमिक विद्यालय की कक्षाएं चलती हैं। लेकिन अब ये परंपरा टूटने जा रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर (Deepak Kesarkar) ने विधानसभा में छोटे बच्चों के स्कूल का समय बदलने की घोषणा की है।

बदलती जीवनशैली के कारण सुबह जल्दी स्कूल होने से बच्चों को पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती है। हाल ही में महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने बच्चों के स्कूलों का समय बदलने का सुझाव दिया था। इसके बाद अब स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक वर्ष से दूसरी कक्षा तक के छात्रों के लिए स्कूल सुबह 9 बजे के बाद ही शुरू किए जाएंगे। यह भी पढ़े-फिर डराने लगा कोरोना! नए वैरिएंट के खतरे के बीच महाराष्ट्र में मिले डबल डिजिट मरीज, देखें आंकड़े

महाराष्ट्र में प्राइमरी की कक्षाएं सुबह होती हैं। जबकि सेकेंडरी की कक्षाएं दोपहर में आयोजित की जाती हैं। चूंकि माध्यमिक (सेकेंडरी) के छात्रों की उम्र 12 वर्ष से ऊपर तथा प्राइमरी में बच्चों की उम्र 3 से 10 वर्ष तक होती है। इसलिए शिक्षाविदों की ओर से सुझाव दिए जा रहे थे कि प्राइमरी स्कूल दोपहर में और सेकेंडरी स्कूल सुबह में होने चाहिए। यही सुझाव राज्यपाल रमेश बैस ने भी दिया था।

इसके चलते प्राइमरी की दूसरी कक्षा तक की पढ़ाई सुबह नौ बजे होगी। हालांकि केसरकर ने कहा कि अन्य कक्षाओं के संबंध में निर्णय लेने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। स्कूलों का समय बदलने से अब शहरी अभिभावकों को राहत मिलेगी।

शहरों में खासकर बदलती जीवनशैली के कारण सुबह जल्दी स्कूल होने से बच्चों को पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती है। इसलिए, राज्यपाल ने हाल ही में सुझाव दिया था कि सरकार को स्कूलों को देर से खोलने पर विचार करना चाहिए।

दीपक केसरकर ने कहा कि सरकार राज्यपाल की राय से सहमत है। विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की कमी से बच्चों के मस्तिष्क के विकास पर असर पड़ता है। हालांकि इस संबंध में जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन इस पर केवल सरकार का अकेले निर्णय लेना उचित नहीं है, इसलिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है। केसरकर ने कहा कि मनोवैज्ञानिकों और बाल रोग विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।