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महाराष्ट्र: किसानों का 25 करोड़ डकार गए सरकारी बाबू! 22 पटवारी और 5 तहसील कर्मचारी गिरफ्तार

जांच में पता चला कि जिन लोगों के नाम पर एक गुंठा जमीन तक नहीं थी, उन्हें फर्जी तरीके से लाभार्थी सूची में शामिल किया गया। इसके लिए तहसीलदारों के लॉगिन और पासवर्ड का दुरुपयोग कर सरकारी सिस्टम में हेरफेर किया गया। अब तक 22 पटवारी और 5 अधिकारियों समेत 31 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 6 Feb 2026, 4:11 PM IST

Maharashtra Solapur Suicide Case

शेयर बाजार में 1.8 करोड़ रुपये का नुकसान बना काल, घर में मिले 4 शव (Photo: IANS/File)

महाराष्ट्र के जालना जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। जालना आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 करोड़ रुपये के अतिवृष्टि अनुदान (Heavy Rain Subsidy) घोटाले में 31 लोगों को गिरफ्तार किया है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि जिन अधिकारियों पर किसानों तक राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही फर्जी 'किसान' बनकर सरकारी खजाने पर डाका डाला।

ऐसे उजागर हुआ करोड़ों का खेल

यह घोटाला जालना के अंबड और घनसावंगी तालुका में हुआ। जांच में खुलासा हुआ कि भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारी बारिश से बर्बाद हुए किसानों के लिए आए मुआवजे को हड़पने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी साठगांठ से 24 करोड़ 90 लाख 77 हजार 811 रुपये का गबन कर लिया।

तहसीलदार का पासवर्ड चुराया

जांच में पता चला कि जिन लोगों के नाम पर एक गुंठा जमीन तक नहीं थी, उन्हें फर्जी तरीके से लाभार्थी सूची में शामिल किया गया। इसके लिए तहसीलदारों के लॉगिन और पासवर्ड का दुरुपयोग कर सरकारी सिस्टम में हेरफेर किया गया। घोटाले को छिपाने के लिए कागजी और डिजिटल सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई, लेकिन तकनीकी जांच ने पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया।

31 आरोपी सलाखों के पीछे

जब जिला कलेक्टर द्वारा गठित समिति ने इस घोटाले की पुष्टि की, तो अंबड पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ। इसके बाद आरोपी मोबाइल बंद कर और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर फरार होने लगे। हालांकि आर्थिक अपराध शाखा के सहायक पुलिस निरीक्षक मिथुन घुगे और उनकी टीम ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए 31 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में 22 तलाठी (पटवारी), 5 तहसील कर्मचारी, जिला कलेक्टर कार्यालय का एक कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर व नेटवर्क इंजीनियर शामिल हैं।

छानबीन में पता चला कि कंप्यूटर ऑपरेटरों और नेटवर्क इंजीनियरों की मदद से सिस्टम में बदलाव किए गए ताकि घोटाला पकड़ा न जा सके।

कोर्ट से नहीं मिली राहत

आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले जिला सत्र न्यायालय और फिर बॉम्बे हाईकोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर पीठ का दरवाजा खटखटाया। लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा पेश ठोस सबूतों और घोटाले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सभी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

अब प्रशासन ने इन भ्रष्ट बाबुओं से पैसे वसूलने के लिए सख्त रुख अपनाया है। आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। आरोपियों की संपत्तियों पर सरकारी चार्ज चढ़ा दिया गया है ताकि उन्हें बेचा न जा सके।

अब संपत्ति होगी जब्त!

इस मामले में अब तक 35 लोगों की भूमिका सामने आई है। 31 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि 4 फरार आरोपियों की तलाश जारी है। प्रशासन ने घोटाले की रकम वसूलने के लिए सख्त रुख अपनाया है। आरोपियों के बैंक खाते सील किए गए हैं और डिजिटल सबूतों के लिए मोबाइल व लैपटॉप जब्त किए गए हैं।

सहायक पुलिस निरीक्षक मिथुन घुगे ने बताया कि इस घोटाले में अब तक 35 लोगों की संलिप्तता पाई गई है, जिनमें से 31 को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी 4 की तलाश जारी है। इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।