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महाराष्ट्र: कक्षा 5 से 7 तक के छात्रों को बेहोश कर किया रेप! होस्टल में रैगिंग के नाम पर हैवानियत

छात्रावास को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई है। पीड़ित बच्चों का मेडिकल कराया गया है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 6 Mar 2026, 10:31 AM IST

Mumbai woman stripping case

महाराष्ट्र पुलिस (Photo; IANS/File)

महाराष्ट्र के नासिक जिले से शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है। जहां समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इगतपुरी स्थित एक सरकारी छात्रावास (हॉस्टल) में कक्षा 10 के सात छात्रों पर जूनियर छात्रों का यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मासूमों को हवस का शिकार बनाने के लिए उन्हें बेहोशी की दवा दी जाती थी।

7 महीने तक चलता रहा दरिंदगी का खेल

पुलिस और जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घिनौनी करतूत पिछले सात महीनों से छात्रावास की चारदीवारी के भीतर चल रही थी। आरोप है कि कक्षा 10 के सात छात्र, उसी हॉस्टल में रहने वाले कक्षा 5 से 7 तक के छोटे बच्चों को डराते-धमकाते थे और उन्हें नशीली दवा पिलाकर उनके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध (Unnatural Sex) बनाते थे। डर के कारण पीड़ित छात्र महीनों तक चुप्पी साधे रहे, लेकिन जब यह मामला सामने आया तो हड़कंप मच गया।

अधिकारियों ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब एक बच्चे ने इसका विरोध किया और अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मामले की जांच के लिए पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई है।

हॉस्टल अधीक्षक ने मामले को दबाया

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा छात्रावास के अधीक्षक सुशांत दुधसागरे की भूमिका को लेकर हुआ है। जांच में पता चला है कि कुछ पीड़ित छात्रों ने इस उत्पीड़न की जानकारी अधीक्षक को दी थी। लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और मामले को दबाने की कोशिश की। इसी लापरवाही के कारण पुलिस ने अधीक्षक को भी इस मामले में आरोपी बनाया है।

POCSO और रैगिंग एक्ट के तहत कार्रवाई

नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने बताया कि इगतपुरी पुलिस थाने में 3 मार्च को मामला दर्ज किया गया है। सात आरोपी छात्रों और छात्रावास अधीक्षक के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही रैगिंग विरोधी अधिनियम (Anti Ragging Act) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

आरोपी छात्र सुधारगृह भेजे गए

पुलिस ने सातों आरोपी छात्रों को हिरासत में लेकर गुरुवार को किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board Nashik) के समक्ष पेश किया। सभी को सुधारगृह भेज दिया गया है, जबकि बाल कल्याण समिति मामले की गहराई से जांच कर रही है।

आगे की जांच में होंगे चौंकाने वाले खुलासे

इस घटना के बाद समाज कल्याण विभाग और छात्रावास प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि छात्रों के पास बेहोशी की दवाएं कहां से आती थीं और क्या इस घिनौने अपराध में हॉस्टल का कोई अन्य कर्मचारी भी शामिल है।

जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।

छात्रावास किया गया बंद

छात्रावास को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है और जिला प्रशासन ने मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ित बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम ने छात्रावास का दौरा किया।

जानकारी के मुताबिक, यह छात्रावास एक निजी रूप से संचालित आवासीय सुविधा है, जहां अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति (VJNT) से जुड़े आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लड़के रहते हैं। अधिकारियों के अनुसार, छात्रावास की स्वीकृत क्षमता 50 छात्रों की है, जबकि फिलहाल यहां 46 लड़के रह रहे थे।

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