
बागी 12 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग, राउत ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात
Maharashtra-Karnataka Border Issue: केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद थमता नजर आ है। हालांकि इस संवेदनशील मुद्दे पर सियासी बयानबाजी जारी है। इसी कड़ी में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने मांग की कि सीमा विवाद पर जब तक सुप्रीम कोर्ट का निर्णय नहीं आ जाता है, तब तक कर्नाटक सरकार को बेलगावी में विधानसभा सत्र नहीं बुलानी चाहिए।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि दोनों राज्य काफी समय से लंबित विवाद पर यथास्थिति बनाए रखेंगे। राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा, ‘‘हमने (महाराष्ट्र) बेलगावी का दावा नहीं किया है। यह महाराष्ट्र का है। वास्तव में कर्नाटक महाराष्ट्र के सोलापुर और सांगली क्षेत्रों पर दावा कर रहा है।’’ यह भी पढ़े-महाराष्ट्र के वाहनों पर पथराव से बढ़ा तनाव, CM बोम्मई बोले- दोषियों को नहीं छोड़ेंगे
बीते कुछ हफ़्तों से कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा विवाद गहरा गया। कर्नाटक में 865 मराठी भाषी गांवों पर महाराष्ट्र के दावा करने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन हुए। हालांकि इस मुद्दे पर समाधान के लिए बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कर्नाटक सीएम बसवराज बोम्मई, गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र को दिल्ली बुलाया।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा “दोनों पक्षों के साथ बहुत अच्छे माहौल में बात हुए। जब तक सुप्रीम कोर्ट का इसपर फैसला नहीं आ जाता, कोई भी राज्य इस बारे में एक-दूसरे राज्य पर दावा नहीं करेगा। दोनों तरफ से 3-3 मंत्री बैठेंगे और इसपर चर्चा करेंगे। दोनों राज्यों के बीच और मुद्दे भी हैं, इनका निवारण भी ये मंत्री करेंगे।“
महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा “पहली बार केंद्र सरकार ने इसमें हस्तक्षेप किया है। सरकार ने इसकी गंभीरता को समझ लिया है। ये एक बड़ी पहल है और इससे दोनों राज्यों की जनता को तकलीफ नहीं होगी, शांति और अमन बना रहेगा। जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में है तब तक कोई भी राज्य कोई कदम नहीं उठाएगा।”
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा “कर्नाटक और महाराष्ट्र के लोगों के बीच बहुत ही सौहार्दपूर्ण संबंध है, दोनों पक्षों की शांति को भंग करने के लिए कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए। दोनों राज्यों से मंत्रियों की एक कमेटी बनाई गई है जो छोटे-छोटे मुद्दों को सुलझाने का काम करेगी।“
गौरतलब है कि महाराष्ट्र लंबे समय से उत्तरी कर्नाटक में बेलगावी और आस-पास के सीमावर्ती क्षेत्रों पर दावा करता रहा है क्योंकि वहां मराठी भाषी लोगों की बड़ी आबादी रहती है। हाल ही में दोनों राज्यों के बीच बयानबाजी और विवाद से तनाव बढ़ गया था।
Published on:
15 Dec 2022 12:39 pm
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