25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बेलगाम सीमा पर कन्नड़ संगठन का उग्र प्रदर्शन, महाराष्ट्र की गाड़ियों पर पथराव, सैकड़ों लोग हिरासत में

Maharashtra Karnataka Border Dispute: कन्नड़ संगठन के कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र से आए छह ट्रकों पर पथराव किया। साथ ही ट्रक पर झंडे लगा दिए। पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।

less than 1 minute read
Google source verification

मुंबई

image

Dinesh Dubey

Dec 06, 2022

maharashtra_and_karnataka_border_dispute_update.jpg

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर विवाद

Kannada Organization Protest on Belagavi Border: महाराष्ट्र के साथ बढ़ते सीमा विवाद (Maharashtra and Karnataka Border Dispute) के बीच कर्नाटक के बेलगाम बॉर्डर पर कन्नड़ संगठन ने उग्र प्रदर्शन किया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र की कई गाड़ियों को निशाना बनाया और उन पर पथराव किया। पुलिस ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है।

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री द्वारा बेलगाम समेत जत, अक्कलकोट और अन्य क्षेत्रों पर दावा किए जाने के बाद आज कन्नड़ संगठन ने बेलगाम बॉर्डर के पास विरोध प्रदर्शन किया। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र के दो मंत्री आज नहीं जाएंगे बेलगाम, कर्नाटक सरकार बोली ‘बिगड़ सकते है हालात’

इस दौरान कन्नड़ संगठन के कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र से आए छह ट्रकों पर पथराव किया। साथ ही ट्रक पर झंडे लगा दिए। पुलिस ने करीब 400 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। कन्नड़ संगठनों के उपद्रव के बाद कर्नाटक सरकार से महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई की मांग की है।

बताया जा रहा है की यह पथराव कन्नड़ रक्षण वेदिका (Karnataka Rakshana Vedike) द्वारा हिरेबागवाडी टोल बूथ (Hire Bagewadi Toll Gate) पर किया गया। इसके अलावा महाराष्ट्र के ट्रकों पर कालिख भी पोती गई। इससे पहले महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल और शंभुराज देसाई ने बेलगाम दौरा टाल दिया है। कन्नड़ संगठनों के विरोध के मद्देनजर बेलगाम सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इस घटना से महाराष्ट्र-कर्नाटक में अनबन बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र बेलगाम, करवार और निप्पनी सहित कर्नाटक के कई हिस्सों पर दावा करता है, उसका तर्क है कि इन में बहुमत आबादी मराठी भाषी है। यह मामला कई वर्षों से देश की शीर्ष कोर्ट में लंबित है।