
मुंबई में बेमौसम बारिश से बढ़ी ठिठुरन (Photo: IANS/File)
बंगाल की खाड़ी और बांग्लादेश के तटीय भागों में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण महाराष्ट्र में एक बार फिर भारी बारिश का दौर लौट आया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस प्रणाली बंगाल की खाड़ी से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे महाराष्ट्र के कोकण और घाट क्षेत्रों में अगले चार से पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। खासकर रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग के अलावा पुणे, नासिक, कोल्हापुर और सतारा के घाट क्षेत्रों में मूसलधार बरसात आफत बन सकती है। यहां के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जिस वजह से स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की गई है।
मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे, पालघर, विदर्भ और मराठवाडा के कुछ हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में बिजली चमकने के साथ हलकी बारिश की आशंका के चलते येलो अलर्ट घोषित किया गया है।
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। हालांकि इन क्षेत्रों में अब तक मानसून कमजोर रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि विदर्भ के कुछ जिलों में भीषण बारिश हो सकती है।
पुणे और घाट इलाकों में पिछले कुछ दिनों से बारिश की तीव्रता में कमी आई है। शहर में धूप और बादलों का मिला-जुला वातावरण बना हुआ है। मुंबई में भी सोमवार सुबह से आसमान में बादल छाए रहे। आईएमडी के अनुसार, मुंबई शहर और उपनगरों में आज आसमान में बादल छाए रहेंगे। इस दौरान कुछ जगहों पर मध्यम बारिश की भी संभावना है।
विदर्भ में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। जून में नागपुर जैसे जिलों में औसत वर्षा दर्ज नहीं की गई है, जिससे किसानों की बुवाई प्रभावित हो रही है। प्रशासन ने सलाह दी है कि कम से कम 100 मिमी बारिश के बाद ही बुवाई की जाए, लेकिन कुछ किसानों ने हल्की बारिश के बाद बुवाई शुरू कर दी। इससे फसलें खतरे में पड़ सकती हैं। हालांकि अगले दो दिनों तक गरज के साथ बारिश हो सकते है। इससे किसानों को थोड़ी राहत जरुर मिलेगी।
मई महीने में राज्य में अच्छी बारिश हुई थी और मानसून समय से पहले पहुंच गया था, लेकिन जून की शुरुआत में मानसून धीमा पड़ गया। मराठवाड़ा और विदर्भ में जून के महीने में बारिश ने औसत का आंकड़ा नहीं छू पाया, जिससे पीने के पानी और खेती को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ा संकट किसानों के सामने खड़ा हो गया।
Updated on:
30 Jun 2025 11:36 am
Published on:
30 Jun 2025 11:33 am
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