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Maharashtra News: 35 वर्षीय ड्राइवर को स्कूल बस चलाते समय आया हार्ट अटैक, कई बच्चों की बचाई जान; फिर हुई मौत

महाराष्ट्र के कोल्हापुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कोल्हापुर में स्कूली छात्र बस चालक के रूप में एक 'संकटमोचक' से मिले। राधानगरी तालुका के पिंपलवाड़ी की ओर जाने वाली सड़क पर स्कूली छात्रों को ले जा रहे एक बस चालक को अचानक हार्ट अटैक आया। इस समय बस में छात्र सवार थे, इसलिए चालक बस को एक तरफ ले गया।

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Kolhapur Bus Driver

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक बड़ा हादसा होने से टल गया। स्कूली छात्र बस चालक के रूप में एक 'संकटमोचक' से मिले। राधानगरी तालुका के पिंपलवाड़ी की तरफ जाने वाली सड़क पर स्कूली छात्रों को ले जा रहे एक बस चालक को अचानक हार्ट अटैक आ गया। इस दौरान बस में छात्र सवार थे, जिसकी वजह से चालक बस को एक तरफ ले गया। बच्चों की जान बचाने के बाद बस चालक की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब चालक कुछ मिनट पहले गहरी खाई से गुजरते हुए सड़क पार कर रहा था।

कोल्हापुर के राधानगरी तालुक में पिंपलवाड़ी की तरफ जाने वाली सड़क पर स्कूली छात्रों को ले जा रहे एक बस चालक को अचानक हार्ट अटैक आ गया। जिसके बाद बस में छात्र होने की वजह से चालक ने बस को एक तरफ खींच लिया। इससे बड़ा हादसा टल गया। बस ड्राइवर की पहचान सतीश सतपा कांबले के रूप में हुई है। जिसकी उम्र 35 साल थी। यह भी पढ़ें: Gram Panchayat Election 2022: महाराष्ट्र के 1166 ग्राम पंचायतों के चुनाव की तारीख जारी, 13 अक्टूबर को होगा मतदान

बता दें कि बस को सुरक्षित जगह पर रोककर बस ड्राइवर सतीश कांबले की मौत हो गई। चालक सतीश कांबले कोल्हापुर के राधानगरी तालुका के पिंपलवाड़ी से स्कूली छात्रों के साथ भोगवती हाई स्कूल आ रहे थे। पिंपलवाड़ी और भोपालवाड़ी के बीच एक बड़ी घाटी है। यह सड़क एकतरफा यातायात है। कल दोपहर जब बस इसी डेढ़ किलोमीटर के रास्ते पिंपलवाड़ी से छात्रों को लेकर बरगेवाड़ी पहुंच रही थी तभी अचानक चालक सतीश को हार्ट अटैक आ गया। सतीश कांबले ने कुछ मिनट पहले ही यहां गहरी खाई के पास करीब आधा किलोमीटर सड़क पार कर ली थी। सतीश की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई लेकिन उसने कई बच्चों की जान बचा ली।

सतीश कांबले की मौत के बाद इस बस में सफर कर रहे छात्र भी काफी डरे हुए थे। इस बीच बस ड्राइवर सतीश कांबले को फौरन कोल्हापुर के एक सरकारी हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया गया। तब तक सतीश की मौत हो चुकी थी। लेकिन दिल का दौरा पड़ने के बाद भी सतीश ने कड़ा संघर्ष किया और कई बच्चों की जान बचाई।