
Tiger
गुरुवार को महाराष्ट्र के विदर्भ में वन विभाग टीम ने एक आदमखोर बाघ को पकड़ने में आखिरकार कामयाबी हासिल की। इस बाघ ने विदर्भ क्षेत्र में 13 लोगों को शिकार बनाकर मार डाला था। इसके बाद बाघ को गोरेवाड़ा बचाव केंद्र में पुनर्वास के लिए भेज दिया। इसे लेकर वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि विदर्भ क्षेत्र के गढ़चिरौली और चंद्रपुर जिलों में 13 लोगों की हत्या के बाद आदमखोर बाघ सीटी -1 को शांत करके उसे रेस्क्यू कर लिया गया है। यह बाघ गढ़चिरौली में वडसा वन क्षेत्र में घूम रहा था और मानव जीवन के लिए खतरा था।
बाघ को पकड़ने के इस अभियान से संबंधित एक अधिकारी ने कहा कि गढ़चिरौली के वडसा वन क्षेत्र में आदमखोर बाघ ने अपना डेरा जमा लिया था। यहां के स्थानीय लोग उसके हमले से परेशान हो चुके थे, वह लोगों की जान के लिए खतरा बन गया था। इस आदमखोर बाघ ने वडसा में करीब 6, भंडारा में 4 और चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी वन रेंज में तीन लोगों को अपना शिकार बना चुका था। यह भी पढ़ें: Mumbai News: एयरपोर्ट पर कस्टम की बड़ी कार्रवाई, 15 किलो गोल्ड और 22 लाख की विदेशी मुद्रा समेत 7 गिरफ्तार
बता दें कि नागपुर के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने इस महीने की चार तारीख को एक बैठक में बाघ सीटी -1 को पकड़ने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद तडोबा टाइगर रेस्क्यू टीम, चंद्रपुर, नवेगांव-नागजीरा की रैपिड रिस्पांस टीमों और अन्य इकाइयों ने बाघ को पकड़ने के लिए एक योजना तैयार की। इस योजना के तहत टीमों ने इस बाघ को शांत किया और गुरुवार सुबह वडसा वन रेंज से रेस्क्यू कर लिया। इस बाघ को यहां से करीब 183 किलोमीटर दूर नागपुर के गोरेवाड़ा बचाव केंद्र में पुनर्वास के लिए भेजा गया है।
बाघ जो शावकों की रक्षा करने या अपनी जान बचाने का प्रयास करने जैसी परिस्थितियों के अलावा इंसानों पर हमला करते हैं उन्हें संघर्षरत बाघ कहा जाता है। आमतौर पर बाघ इंसानों पर तभी हमला करता है जब उसे खुद के लिए खतरे का अंदेशा लगता है जैसे कि अगर उसे लगता है कि कोई उसके बच्चे को हानि पहुंचाने की कोशिश कर रहा है या कोई और उसकी जान के पीछे है वगैरह।
Updated on:
13 Oct 2022 07:00 pm
Published on:
13 Oct 2022 07:00 pm
