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करोड़ों के घोटाले में फंसे पीएमसी बैंक का महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में होगा विलय!

कैबिनेट मंत्री जयंत पाटील ने दिया संकेत, जमाकर्ताओं को नहीं होगा कोई नुकसान करोड़ों के घोटाले के मद्देनजर पीएमसी बैंक के परिचालन पर लगाई गई है रोक पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और ईडी कर रही मामले की जांच  

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करोड़ों के घोटाले में फंसे पीएमसी बैंक का महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में होगा विलय!

करोड़ों के घोटाले में फंसे पीएमसी बैंक का महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में होगा विलय!

मुंबई. करोड़ों रुपए के घोटाले में फंसे पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के परेशान जमाकर्ताओं के लिए महाराष्ट्र विकास आघाडी सरकार की ओर से राहत का संकेत है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के साथ पीएमसी बैंक के विलय पर विचार कर रही है। राज्य के कैबिनेट मंत्री जयंत पाटील ने गुरुवार यह संकेत किया। पाटील ने कहा कि सरकार चाहती है कि पीएमसी बैंक के खाताधारकों को कोई नुकसान न हो। इसीलिए राज्य सहकारी बैंक के साथ इसके विलय पर विचार किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि घपले को भांपते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर में पीएमसी बैंक के परिचालन पर रोक लगा दिया था। मामले की जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय भी कर रहा है।

पाटील ने बताया कि पीएमसी बैंक के जमाकर्ताओं को आर्थिक नुकसान से बचाने के उपायों पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि कई जमाकर्ताओं की जीवन भर की कमाई पीएमसी बैंक में जमा है। इन ग्राहकों को डर है कि बैंक डूबा तो उनका पैसा भी डूब जाएगा। राज्य सहकारी बैंक के अधिकारियों के साथ चर्चा इस विषय पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि एक बार पूरा खाका तैयार होने के बाद रिजर्व बैंक के समक्ष प्रस्ताव रखा जाएगा। विदित हो कि घोटाला पकड़ में आने के बाद रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक के निदेशक मंडल को बर्खास्त करते हुए प्रशासक नियुक्त किया है।

कोर्ट की निगरानी में कमेटी बनाने की मांग
पीएमसी बैंक घोटाला मामले में हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि बैंक के लिए नियुक्त प्रशासक ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इस कारण खाताधारकों को असुविधा हो रही है। वकील ने अदालत की निगरानी में एक कमेटी बनाने का सुझाव दिया ताकि बकाएदारों की संपत्ति बेच कर जमाकर्ताओं की पैसा लौटाया जा सके।

4,355 करोड़ का घोटाला
पीएमसी बैंक में 4,355 का घोटाला हुआ है। सबसे ज्यादा पैसा रिटल इस्टेट डेवलपर एचडीआईएल में डूबा है। एचडीआईएल ने बैंक से 2,500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। यह पैसा कंपनी लौटा नहीं पाई। ब्याज सहित कंपनी पर बैंक का बकाया 4,3555 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस पैसे से एचडीआईएल के प्रमोटर सारंग वधावन और राकेश वधावन ने मुंबई, अलीबाग, वसई के अलावा देश-विदेश में कई प्रॉपर्टी खरीदी। ईओडब्लू ने वधावन पिता-पुत्र की वसई, अलीबाग व मुंबई की संपत्ति जब्त की है। एचडीआईएल को डिफॉल्टर घोषित कर बैंक के शीर्ष प्रबंधन से जुड़े लोगों ने इस पर पर्दा डालने का काम किया।

कई लोग गिरफ्तार
पीएमसी बैंक घोटाले के मामले में बैंक के पूर्व वरयाम सिंह, एमडी जॉय थॉमस सहित कई पूर्व संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। एचडीआईएल के प्रमोटर सांरग और राकेश वधावन भी सलाखों के पीछे हैं। फॉरेंसिक ऑडिट के माध्यम से रिजर्व बैंक यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि बैंक से लिया गया कर्ज किस तरीके से किन लोगों को ट्रांसफर किया गया।