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Maharashtra Politics: शिंदे खेमे में पड़ी दरार? 2 विधायकों में हुई तकरार; नासिक से जुड़े हैं तार

शनिवार को नासिक विधायक कांदे ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री दादा भुसे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने दादा भूसे पर आरोप लगाए हैं कि भुसे ने उन्हें क्षेत्र का विधायक होने के बाद भी जिले की बैठकों में बुलाना बंद कर दिया।

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CM Eknath Shinde

महाराष्ट्र में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। बालासाहेबांची शिवसेना यानी सीएम एकनाथ शिंदे के समर्थन वाले खेमे में भी नेताओं की नाराजगी सामने आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीएम शिंदे के समर्थक विधायक सुहास कांदे ने पार्टी के कुछ फैसलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने नजरअंदाज किए जाने के भी आरोप लगाए हैं। विधायक ने उम्मीद जताई है कि शिंदे उनकी परेशानियों को सुनेंगे।

शनिवार को नासिक विधायक कांदे ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री दादा भुसे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दादा भूसे आरोप लगाए हैं कि भुसे ने उन्हें क्षेत्र का विधायक होने के बाद भी जिले की अहम बैठकों में बुलाना बंद कर दिया है। कांदे ने कहा कि जिला स्तर पर संगठन में सही लोगों को नहीं चुना गया है। विधायक ने जानकारी दी कि इसकी शिकायत सीएम एकनाथ शिंदे को भी कर दी गई है। यह भी पढ़े: Maharashtra News: मंहगाई से परेशान होकर कोल्हापुर के दूल्हे ने ऐसे निकाली बारात, लिखा-अच्छे दिन आ गए

बता दें कि नासिक जिले से ही आने वाले दादा भुसे और सुहास कांदे दोनों ही नेता शिंदे खेमे के हैं। इधर, सुहास कांदे दावा कर रहे हैं कि वह अंतिम सांस तक शिंदे के साथ कंधे से कंधा मिलकर खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह सच है कि मुझे जिले की किसी बैठक में नहीं बुलाया जा रहा है। जिले से जुड़ा कोई निर्णय लेने से पहले भी मुझे भरोसे में नहीं लिया जाता। दादा भुसे उनके साथ जिले की योजना या विकास के कामों के बारे में कोई चर्चा नहीं करते हैं।

शिंदे गुट के विधायक का कहना है कि उन्हें नियुक्तियों के बारे में न्यूजपेपर से जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि नियुक्तियां सही नहीं हैं , क्योंकि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए काम नहीं करते। दुर्भाग्य से यह पार्टी की बढ़त को प्रभावित करता है। उनके चलते जिले में पार्टी में इनकमिंग बंद हो गई है। मैं नियुक्तियों के बारे में शिंदे साहब से शिकायत की है।

सुहास कांदे ने आगे कहा कि सिर्फ उनके लिए मैं अपमानित होने और एक कदम पीछे लेने के लिए रेडी हूं। लेकिन मैं उनका साथ अंतिम सांस तक नहीं छोड़ूंगा। बता दें कि इसी साल जून में सीएम शिंदे ने तब की शिवसेना में 40 विधायकों के साथ बगावत कर दी थी। बाद में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार गिरी और शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी।