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Maharashtra: ‘…मेरी आंखों में आंसू आ गए थे’, शरद पवार ने सुनाया सुशील कुमार शिंदे से जुड़ा अनसुना किस्सा

Sharad Pawar on Sushilkumar Shinde Friendship: एनसीपी (NCP) नेता शरद पवार ने कहा, सुशील कुमार शिंदे ने मेरे कहने पर पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ी थी। उन्होंने शिवसेना की आगामी दशहरा रैली पर भी प्रतिक्रिया दी है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Oct 03, 2022

Sharad Pawar on Sushilkumar Shinde

शरद पवार और सुशील कुमार शिंदे

Sharad Pawar on Sushilkumar Shinde: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे की दोस्ती को लेकर हमने कई किस्से पढ़े होंगे। कहा जाता है कि इनकी दोस्ती राजनीति से परे है। इसका प्रमाण खुद शरद पवार ने दिया है। पुणे में उन्होंने कांग्रेस नेता से जुड़ा अपनी दोस्ती का एक और अनसुना किस्सा सुनाया है।

पुणे में एक कार्यक्रम में बोलते हुए एनसीपी (NCP) नेता शरद पवार ने कहा, सुशील कुमार शिंदे ने मेरे कहने पर पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ी थी। मैंने उन्हें आश्वासन दिया था कि उन्हें उपचुनाव में विधायक का टिकट मिलेगा। लेकिन उन्हें मैं टिकट नहीं दिला पायातो मेरी आंखों में आंसू आ गए। यह भी पढ़े-Maharashtra Politics: एकनाथ खडसे की होगी ‘घर वापसी’? अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस से जल्द करेंगे मुलाकात

उन्होंने आगे कहा “मैं उस सरकार में गृह मंत्री बना था। चूंकि शिंदे कानून में ग्रेजुएट थे, इसलिए मैंने उन्हें सरकारी वकील बना दिया। हमारे पास जो भी मामले आते थे, उसे हमने शिंदे को देने का फैसला किया। बाद में अगले चुनाव में शिंदे को टिकट दिलाने में कामयाब हो गया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।“

पुणे नवरात्रि महोत्सव 2022 (Pune Navratri Utsav 2022) में हर साल दिया जाने वाला 'महर्षि' पुरस्कार इस साल एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार द्वारा सुशील कुमार शिंदे को दिया गया। इस कार्यक्रम की अगुवाई पूर्व विधायक उल्हास पवार ने की। जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व राज्य मंत्री विश्वजीत कदम मौजूद रहे।


शिवसेना की दशहरा रैली पर दी प्रतिक्रिया

इस मौके पर शरद पवार ने कहा कि दशहरा रैली को लेकर राज्य में जो राजनीति हो रही है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा “एक पार्टी दो हिस्सों में भले ही बंट गई हो, लेकिन इससे राज्य का राजनीतिक माहौल खराब नहीं हो, इस बात का ध्यान प्रमुख नेताओं को रखना चाहिए। हम जैसे सीनियर्स नेताओं से भी चर्चा करनी चाहिए। दशहरा रैली में जो भी रुख अपनाया जाता हैं, उससे कड़वाहट नहीं बढ़नी चाहिए।“