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प्री-मानसून का कहर: महाराष्ट्र में 5 लोगों और 36 पशुओं की गई जान, 1.5 लाख हेक्टेयर खेती चौपट

Maharashtra Pre-Monsoon Rain: महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को 128.65 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया है। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्र पर देखने को मिला है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Apr 08, 2026

Pre-monsoon rain Maharashtra

महाराष्ट्र में प्री-मानसून ने मचाई तबाही, इस साल 5 लोगों की मौत (Photo: IANS/File)

महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। राज्य के कई जिलों में प्री-मानसून की इस सक्रियता से न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ, बल्कि जान-माल का भी बड़ा नुकसान हुआ। प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, बिजली गिरने और बारिश से संबंधित विभिन्न हादसों में इस साल मार्च तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा लाखों हेक्टेयर फसल चौपट हो गई है।

महाराष्ट्र में प्री-मानसून ने मचाई तबाही

महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मंगलवार को देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बताया गया कि प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने 128.65 करोड़ रुपए की सहायता राशि वितरित की है। यह मदद अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच हुए नुकसान के लिए जारी की गई है।

पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर महीने में हुई तूफानी बारिश ने राज्य के कृषि क्षेत्र में भारी संकट पैदा कर दिया था। चंद्रपुर, धुले, गढ़चिरौली, जलगांव, नासिक, रायगढ़ और सिंधुदुर्ग जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर फसलें बर्बाद हुईं। करीब 1,14,752 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई और 1,80,574 किसानों को नुकसान झेलना पड़ा।

2026 की शुरुआत भी रही मुश्किल, लाखों किसान प्रभावित

नए साल की शुरुआत से ही खराब मौसम के कारण महाराष्ट्र के किसानों की समस्याएं बढ़ गई हैं। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच हुई बेमौसम बारिश में 1.45 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इस दौरान करीब 2.33 लाख किसान प्रभावित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है। लातूर, सोलापुर, नासिक, सातारा, धुले, नंदुरबार, यवतमाल, अहिल्यानगर, पुणे, जालना, छत्रपति संभाजीनगर, बुलढाणा और बीड जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

फल-सब्जियों से लेकर अनाज तक सब तबाह

इस प्राकृतिक मार में लगभग सभी प्रमुख फसलें प्रभावित हुई हैं। केले, प्याज, पपीता, आम, अंगूर जैसे बागायती उत्पादों के साथ-साथ गेहूं, चना और ज्वार जैसी मुख्य फसलें भी भारी नुकसान का शिकार हुई हैं। किसानों के लिए यह नुकसान सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि आने वाले सीजन के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।

अप्रैल में ओलावृष्टि ने बढ़ाई मुश्किलें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण 1.94 लाख किसानों को 1.22 लाख हेक्टेयर जमीन पर नुकसान हुआ है। फिलहाल इस नुकसान का विस्तृत आकलन जारी है और प्रशासन ने जल्द से जल्द मुआवजा देने के लिए पंचनामा प्रक्रिया तेज कर दी है।

जान-माल का भी भारी नुकसान

इस आपदा ने सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि जनजीवन को भी प्रभावित किया है। बेमौसम बारिश और इससे जुड़े हादसों में जनवरी से मार्च के दौरान 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 36 पशुओं की भी जान गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में हालात और गंभीर हो गए हैं।

सरकार बोली- जल्द मिलेगा पूरा मुआवजा

राज्य सरकार का कहना है कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नुकसान का सही आकलन कर समय पर मुआवजा दिया जाए, ताकि किसानों को इस संकट से उबरने में मदद मिल सके। जबकि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 128.65 करोड़ रुपए की सहायता दी की।