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रायगढ़ भूस्खलन: एक महीने बाद भी इरशालवाडी के 57 ग्रामीण है लापता, 144 लोग कंटेनर में बिता रहे जीवन

Irshalwadi Landslide News: राज्य सरकार ने इस आपदा में लापता लोगों को मृत घोषित करने का निर्णय लिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 22 बच्चे अनाथ भी हुए है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 18, 2023

Raigad Irshalwadi Landslide News

इरशालवाडी गांव के 100 से ज्यादा लोग अभी भी लापता

Raigad Landslide: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खालापुर तहसील (Khalapur) के इरशालवाडी गांव (Irshalwadi Landslide) में पिछले महीने हुए भूस्खलन में अब तक 29 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जबकि इस भयावह त्रासदी के बाद भी 57 ग्रामीणों का कुछ पता नहीं चला है। माना जा रहा है कि दर्जनों ग्रामीण मलबे में दबे हुए हैं। हालांकि इरशालवाडी में सर्च ऑपरेशन कब का बंद हो चुका है।

रायगढ़ जिला प्रशासन ने पहले मरने वालों की संख्या 27 बताई थी। बाद में मृतकों की सूची में दो और लोगों को जोड़ा गया। वहीँ, इरशालवाडी गांव के जिन 25 लोगों का इलाज अस्पताल में चल रहा था, वह अब डिस्चार्ज हो चुके है। सरकार ने इस आपदा में लापता लोगों को मृत घोषित करने का निर्णय लिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 22 बच्चे अनाथ भी हुए है। यह भी पढ़े-रायगढ़ लैंडस्लाइड: पलक झपकते ही ‘मलबा’ बना इरशालवाडी गांव, किसी के माता-पिता तो किसी का पूरा परिवार दबा!

खालापुर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, "हमें मौतों का नया आंकड़ा नहीं मिला है।" जिला प्रशासन के आंकड़ों की मुताबिक, इरशालवाडी में बचे हुए 144 लोग अभी हटनोली गांव (Hatnoli Village) में खाली पेट्रोल पंप की जगह पर कंटेनर से बने अस्थायी घरों में रह रहे है। प्रशासन इन पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था कर रहा है।

भूस्खलन में अपने माता-पिता को खोने वाले 22 बच्चों के लिए प्राथमिक विद्यालय और एक आंगनवाड़ी शुरू किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि 19 जुलाई की रात जब भूस्खलन हुआ तो अनाथ हुए कई बच्चे इरशालवाडी में नहीं थे। कई अनाथ बच्चे आदिवासी बच्चों के लिए सरकार द्वारा संचालित या वित्त पोषित आवासीय विद्यालय यानी ‘आश्रम’ स्कूलों में थे।

राज्य सरकार का नगर एवं औद्योगिक विकास निगम (सीआईडीसीओ) जमीन मिलने के 100 दिनों के भीतर प्रभावित लोगों के लिए स्थायी घर बनाएगा। इरशालवाडी गांव में स्थित 48 में से कम से कम 17 घर भूस्खलन की चपेट में आये थे। NDRF व स्थानीय प्रशासन की टीमों ने मलबे से 27 शव बरामद करने के बाद खोज और बचाव अभियान बंद कर दिया था। दुर्गम इलाके में स्थित इरशालवाडी आदिवासी ठाकर समुदाय का गांव था।