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मालेगांव ब्लास्ट: ATS, CBI और NIA… तीन एजेंसियों की जांच में कई आरोपी, 4 पर ट्रायल, 20 साल बाद सब बरी

Malegaon 2006 Blast Case Verdict: मालेगांव में 8 सितंबर 2006 को हुए सिलसिलेवार धमाकों में 37 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस केस की जांच सबसे पहले महाराष्ट्र ATS ने की थी। इसके बाद फरवरी 2007 में जांच सीबीआई को सौंपी गई और बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने केस अपने हाथ में लिया। लेकिन इस मामले में सभी आरोपी अब बरी हो चुके है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 22 Apr 2026, 2:46 PM IST

malegaon blast 2006 Verdict

मालेगांव ब्लास्ट: 20 साल का लंबा इंतजार और नतीजा सिफर

साल 2006 के मालेगांव बम धमाकों (Malegaon Blast 2006) के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले के शेष चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया है। इस फैसले के साथ ही करीब दो दशक पुराने इस मामले में चल रहा ट्रायल समाप्त हो गया है।

हाईकोर्ट ने रद्द किया स्पेशल कोर्ट का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी, धन सिंह और मनोहर राम सिंह नरवरिया की अपीलों को स्वीकार करते हुए उन्हें बड़ी राहत दी। इन चारों आरोपियों ने विशेष अदालत के सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन चारों के खिलाफ चल रहा मुकदमा बंद हो गया है।

तीन जांच एजेंसियां और 20 साल का कानूनी सफर

मालेगांव धमाकों की जांच का सफर बेहद जटिल रहा है। 8 सितंबर 2006 को हुए इन सिलसिलेवार धमाकों में 37 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी। इस मामले की जांच तीन बड़ी एजेंसियों ने की। आतंकी वारदात होने के कारण सबसे पहले जांच महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने की, जिसने 12 लोगों को गिरफ्तार कर दिसंबर 2006 में पहली चार्जशीट पेश की। फिर भारी दबाव के चलते फरवरी 2007 में मामला सीबीआई (CBI) को सौंपा गया। आखिर में जांच की कमान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने संभाली और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर अन्य आरोपियों के साथ-साथ इन चारों को भी नामजद किया था।

मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी, जिसने इस मामले में 9 मुस्लिम युवकों समेत कई को गिरफ्तार किया था। एटीएस पर तब गंभीर आरोप लगे और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसके बाद मामले को सीबीआई को सौंपा गया और फिर एनआईए ने नए सिरे से जांच शुरू की। एनआईए ने दावा किया था कि इस धमाके में दक्षिणपंथी चरमपंथियों का हाथ है। फिर एनआईए ने आज बरी होने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन चारों पर हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए। साथ ही उन पर यूएपीए के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

इस बीच, विशेष अदालत ने एटीएस द्वारा पकड़े गए 9 मुस्लिम युवकों को इस मामले में बरी कर दिया। लेकिन पिछले साल सितंबर में विशेष अदालत ने राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवरिया और लोकेश शर्मा के खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।

अपील में उठाए गए थे गंभीर सवाल

आरोपियों की ओर से दायर अपील में न केवल ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के तरीके को चुनौती दी गई थी, बल्कि इस बात पर भी सवाल उठाए गए थे कि इसी मामले के कई सह-आरोपियों को पहले ही बरी किया जा चुका है। चारों आरोपियों ने अपनी याचिका में दावा किया कि एनआईए के पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

इंसाफ के इंतजार में बीते दो दशक, 37 मौतों का जिम्मेदार कौन?

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। यह मामला भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में लंबी कानूनी लड़ाई का उदाहरण भी बन गया है। 20 साल पहले हुए इस भीषण आतंकी हमले में पहले 12 लोगों को आरोपी बनाया गया, फिर जांच एजेंसियां बदलीं और अंत में केवल 4 आरोपियों पर ट्रायल चल रहा था। आज के फैसले के बाद अब इस मामले में कोई भी आरोपी ट्रायल के अधीन नहीं है।

बता दें कि 8 सितंबर 2006 को नासिक जिले के मालेगांव कस्बे में मुस्लिम बहुल इलाकों में 4 बम धमाके हुए थे। इनमें से तीन धमाके शुक्रवार की नमाज के बाद हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान परिसर में हुए थे, जबकि चौथा धमाका मुशावरत चौक में हुआ था। इन धमाकों में कम से कम 37 लोगों की मौत हो गई थी और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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