
Monsoon Update: इस साल मानसून ने महाराष्ट्र में समय से पहले दस्तक दी और पूरे राज्य में इसकी सक्रियता देखी जा रही है। वर्तमान में मानसून मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के साथ ही विदर्भ के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है। बीते कुछ दिनों में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने राज्य में जनजीवन को काफी प्रभावित किया है। बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 22 पशुओं की जान भी चली गई है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों को देखें तो पुणे और नांदेड जिलों में सबसे अधिक जानमाल की हानि हुई है, जहां तीन-तीन लोगों की मौत हुई है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने शनिवार को केरल में दस्तक दी और रविवार को महाराष्ट्र में मानसून का आगमन हुआ। जबकि अगले 24 घंटों में ही यह मुंबई और पुणे तक पहुंच गया। मानसून आमतौर पर सात जून के आसपास महाराष्ट्र और 10-11 जून को मुंबई पहुंचता है। मौसम विभाग ने आने वाले दो दिनों तक मानसून के और आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियों की संभावना जताई है।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश का कहर जारी है। विदर्भ के कुछ जिलों में गुरुवार को भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मराठवाड़ा और विदर्भ के विभिन्न जिलों में भी तेज बारिश की आशंका मौसम विभाग ने जताई है। बुलढाणा, चंद्रपुर, भंडारा, गढ़चिरौली और गोंदिया जिलों के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
जलगांव में बुधवार को दिनभर बारिश से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन रात के समय अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बादलों की गड़गड़ाहट और तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने शहर और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न कर दी।
जालना जिले में भी पिछले कुछ दिनों से बारिश का कहर जारी है। यहां के बदनापुर और परतूर तालुकों में भारी बारिश से कई जगहों पर खेतों में पानी भर गया और नदियां उफान पर आ गईं। वाशिम जिले में भी बीते दो दिनों से जारी बारिश और तूफानी हवाओं ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसी तरह नासिक में भी तेज बारिश के कारण फल और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को राज्य में भारी बारिश से प्रभावित किसानों और अन्य नागरिकों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। राज्य के राजस्व मंत्री बावनकुले ने कहा कि सीएम फडणवीस ने आदेश दिया है कि भारी बारिश के कारण जिन लोगों ने अपने घर या फसल खो दी हैं, उन्हें वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए।
Published on:
29 May 2025 05:44 pm
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