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मुंबई कोस्टल रोड के दूसरे चरण का शुभारंभ 10 जून को, लीकेज को लेकर CM शिंदे ने दी अहम जानकारी

Mumbai Coastal Road Project : कोस्टल रोड के पहले चरण का उद्घाटन मार्च में हुआ था। कोस्टल रोड को बांद्रा वर्ली ली लिंक से जोड़ा गया है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

May 29, 2024

coastal road second phase

मुंबई में भारत की पहली अंडर सी टनल यानी कोस्टल रोड टनल के दूसरे चरण का शुभारंभ अगले महीने होगा। इस बीच, पहले चरण के उद्घाटन के दो माह बाद पानी का रिसाव दिखने से हड़कंप मच गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने टनल के रिसाव वाली जगहों का निरीक्षण किया है।

सीएम शिंदे ने बताया कि महत्वाकांक्षी कोस्टल रोड परियोजना का दूसरा चरण वर्ली और मरीन ड्राइव के बीच का हिस्सा अगले महीने यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। सीएम शिंदे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मरीन ड्राइव से वर्ली तक तटीय सड़क का दूसरा चरण 10 जून तक यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

सीएम शिंदे ने मंगलवार को दक्षिण की ओर जाने वाली कोस्टल टनल में मरीन ड्राइव छोर पर हो रहे रिसाव का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि कोस्टल रोड टनल में जहां दो हिस्से एक साथ जुड़ते हैं, ऐसे दो से तीन जोड़ से रिसाव हो रहा है। इन रिसावों को ‘पॉलिमर ग्राउटिंग’ से बंद किया जाएगा। हालांकि इस मरम्मत कार्य के दौरान वाहनों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मुंबई कोस्टल रोड का काम अक्टूबर 2018 में शुरू किया गया था। यह परियोजना बहुत बड़ा और जटिल होने के कारण कई दिक्कतें आईं। अदालती रोक और अन्य कारणों की वजह से परियोजना की डेडलाइन बार-बार बढ़ानी पड़ी।

इसके अलावा दूसरे टनल की खुदाई के दौरान तकनीकी समस्या आई और खुदाई के काम में अधिक समय लगा। टनल बनाने का काम भारत के सबसे बड़े टीबीएम यानी टनल बोरिंग मशीन की मदद से किया गया है। मुंबई कोस्टल रोड के दोनों चरण शुरू होने पर यह प्रिंसेस स्ट्रीट (मरीन ड्राइव) से बांद्रा वर्ली सी लिंक के दक्षिणी छोर को कनेक्ट करेगा। कोस्टल रोड के पहले चरण का उद्घाटन मार्च में हुआ था।

मुंबई कोस्टल रोड की खासियतें

मुंबई शहर के यातायात को बेहतर करने की दृष्टि से यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। कोस्टल रोड के टनल अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर बनाए गए है। टनल समुद्र तल से 17-20 मीटर नीचे हैं। दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में धुआं बाहर निकल जाएगा। इसमें ट्रैफिक मैनेजमेंट कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। कोस्टल रोड के दोनों चरण के शुरू होने से ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी। इससे सफर करने पर न केवल समय बल्कि ईंधन की भी काफी बचत होगी। महत्वाकांक्षी कोस्टल रोड परियोजना की अनुमानित लागत 12,721 करोड़ रुपये है।

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