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Mumbai News: BMC ने बच्चों को बहरेपन से बचाने के लिए शुरू की नई पहल, सरकारी हॉस्पिटलों में कराएगी जांच

फिलहाल बीएमसी के पास ऐसा कोई डेटा नहीं है, जिसमें ये पता लग सके कि कितने बच्चे बहरेपन के साथ पैदा होते हैं। इसके लिए जांच शुरू करने का फैसला किया गया है। बीएमसी अब सरकारी हॉस्पिटलों में पैदा हुए बच्चों का जांच कराएगी।

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BMC

मुंबई में बीएमसी हेल्थ को लेकर अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुंबई के सरकारी हॉस्पिटलों में हर साल 70 हजार से ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं। इन बच्चों में किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या न हो इसके लिए बीएमसी ने सरकारी हॉस्पिटलों में पैदा होने वाले हर बच्चे में बहरेपन की जांच करने का निर्णय लिया है। बीएमसी इस बाबत जांच के लिए एक एजेंसी भी नियुक्त करेगी। इस मामले में बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि बीएमसी बच्चे के पैदा होने के 24 से 48 घंटे में इन बच्चों की जांच करना चाहती है। इस जांच के लिए एक एजेंसी को नियुक्त किया जाएगा, जिसको लेकर एक टेंडर भी जारी किया गया है।

बता दें कि फिलहाल बीएमसी के पास ऐसा कोई डेटा नहीं है, जिसमें ये पता लग सके कि कितने बच्चे बहरेपन के साथ पैदा होते हैं। बीएमसी के अधिकारी ने बताया कि इन सरकारी हॉस्पिटलों में इस जांच को शुरू होने में कुछ महीने और लग सकते है। बीएमसी अपने 47 हॉस्पिटलों और जच्चा-बच्चा केंद्र में ये इस जांच की शुरुआत कर सकती है। यह भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi 2022: मुंबई के 'अंधेरीचा राजा' का दर्शन के लिए होगा ड्रेस कोड, अगर ये कपड़े पहना तो नहीं मिलेगी एंट्री

बीएमसी की मेडिकल सर्विस एंड एजुकेशन की निदेशक डॉ नीलम एंड्राडे ने बताया कि ओटोअकॉस्टिक एमिशन टेस्ट (OAE) और ऑटेमेटेड ब्रेनस्टेम रिस्पॉन्स सिस्टम (AABRS) ये पहचानने में मदद करेगा कि कौन सा बच्चा बहरा है। अगर हम बच्चे के जन्म के समय ही पहचान कर लेते हैं तो ये बच्चे की शुरुआती उम्र में ही उपचार में बहुत मदद करेगा। 6 महीने के भीतर बच्चे को सुनने की क्षमता वाले उपकरण मिल सकते हैं, जो उसके विकास में मदद करेंगे।

बता दें कि डॉ नीलम ने आगे कहा कि अगर एक उपकरण बच्चे की मदद नहीं कर पाता है तो कुछ सालों के बाद बच्चे के कान के पर्दे की सर्जरी का एक ऑप्शन बचता है। कम से कम से 3-4 प्रतिशत बच्चे सुनने की प्रॉब्लम के साथ पैदा होते हैं। हम हर बच्चे का रिकॉर्ड अपने पास संभालकर रखेंगे। इसके अलावा हम समय-समय पर परिवार वालों से फॉलो अप टेस्ट कराने के लिए भी बोलेंगे। बीएमसी के एक अधिकारी का कहना है कि एनजीओ की मदद से कान के पर्दे की सर्जरी का पूरा खर्चा बीएमसी उठाएगी।