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Mumbai News: मोबाइल लाइट के भरोसे BMC के सार्वजनिक शौचालय, महिलाओं में डर का माहौल

मुंबई में जहां देश के सबसे अमीर लोग रहते हैं वहां के कुछ सुलभ शौचालयों में आज तक लाइट की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। महिलाओं और पुरुषों को मोबाइल की लाइट लेकर शौच जाना पड़ता है। इस बीच बीएमसी के डिप्टी कमिश्नर राजेश सदानंद अक्रे ने बताया कि महाराष्ट्र की नई सरकार ने इस मुद्दे पर एक बैठक की है और जल्द ही बीएमसी के ऐसे शौचालयों को दुरुस्त करने का काम शुरू हो जाएगा।

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BMC Toilet

मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी कहा जाता है और मुंबई महानगर पालिका (BMC) को देश की सबसे अमीर महानगर पालिका कहा जाता हैं। लेकिन बीएमसी के शौचालयों का सच कुछ और ही बयां करते हैं। दरअसल बीएमसी और म्हाडा के सार्वजनिक शौचालय मोबाइल लाइट के भरोसे चल रहे हैं। सालों पहले बने इन शौचालयों में आज तक लाइट की व्यवस्था नहीं की गई है। अंधेरे में ही महिलाओं को शौच जाना पड़ता है, इससे महिलाओं में छेड़छाड़ का डर हमेशा बना रहता है।

मुंबई में जहां देश के सबसे अमीर लोग रहते हैं वहां के बीएमसी के कुछ सुलभ शौचालयों में आज तक लाइट की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। महिलाओं और पुरुषों को मोबाइल की लाइट लेकर शौच जाना पड़ता है। वैसे तो रात में मुंबई शहर रोशनी से चमचमाती रहती है, लेकिन राज्य सरकार के पास इन सुलभ शौचालयों के लिए लाइट नहीं हैं। सालों से गरीब लोग इन्हीं शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं। यह भी पढ़े: Mumbai Water Taxi: 1 नवंबर से चलेगी मुंबई-मांडवा वॉटर टैक्सी, 45 मिनट में पूरा होगा सफर; इतना होगा किराया

बता दें कि इस संबंध में एक महिला ने बताया कि यहां सालों लाइट की सुविधा नहीं है, उन्होंने कहा कि वह पिछले 6 सालों से यहां साफ-सफाई का काम कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि यहां आने वाले लोग उन्हें साफ-सफाई के लिए पैसे देते हैं, मगर आज तक बीएमसी का कोई कर्मचारी शौचालय की सुधि लेने नहीं आया हैं।

गोरेगांव के कामा स्टेट रोड पर स्थित एक अन्य शौचालय सफाई कर्मी ने बताया कि इस शौचालय में भी सालों से लाइट की सुविधा नहीं है। यहां के लोग मोबाइल की लाइट जलाकर ही शौच के लिए जाते हैं। इस शौचालय को म्हाडा स्कीम के तहत साल 2003-04 में शिवसेना विधायक गजानन कीर्तिकर ने बनवाया था, लेकिन आज तक यहां पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं की गई। महिलाओं ने कहा कि शौचालय में लाइट ना होने पर मोहल्ले की बहन-बेटियों और बहुओं में डर बना रहता है।

इस मामले पर बीएमसी के डिप्टी कमिश्नर राजेश सदानंद अक्रे ने इस समस्या को स्वीकार करते हुए कहा कि ये एक शर्मनाक सच है लेकिन महाराष्ट्र की नई सरकार ने इस मुद्दे पर एक बैठक की है और जल्द ही बीएमसी ऐसे शौचालयों की मरम्मत करेगी और उसकी व्यवस्था ठीक करने पर काम करेगी। इसमें खर्च होने वाले फंड के लिए भी प्रस्ताव भेज दिया गया है।