
Bhiwandi MBBS
मुंबई के भिवंडी की तस्वीर अब पूरी तरह से बदल रही है। भिवंडी के एक मामूली अपार्टमेंट के ड्राइंग रूम में करीब एक दर्जन लड़कियां बैठती हैं। इनमें से कई बुर्का पहने दिखाई देती हैं। इन सबमें एक बात सामान्य है कि ये सभी लड़किया एमबीबीएस पास हैं। यह खूबसूरत तस्वीर भिवंडी की लोकप्रिय छवि से बिल्कुल अलग है। भिवंडी को अब मरता हुआ कपड़ा शहर कहा जाता है। बेरोजगारी और निराशा हमेशा इस शहर की निरूपण करती है जिसे कभी 'भारत का मैनचेस्टर' कहा जाता था।
इस निराशा के बीच यहां डॉक्टरों की एक नई नस्ल पैदा हो रही है जो इस छवि को पूरी तरह से बदल सकती है। शमीम अंसारी की बेटी सोमैया अंसारी को इसका पूरा श्रेय दिया जाता है। सोमैया अंसारी ने कहा कि लड़कियों के भीतर डॉक्टर बनने का सनक सवार है। हमारे पास जल्द ही कई प्रशिक्षित डॉक्टर होंगे। यह भी पढ़ें: Mumbai News: 26/11 जैसे हमले की धमकी के बाद पर्यटकों के लिए गेटवे ऑफ इंडिया बंद, बढ़ाई गई सिक्योरिटी
शानदार प्रदर्शन कर रही है लड़कियां: बता दें कि भिवंडी की लड़कियां नीट की परीक्षा (NEET) में उम्दा प्रदर्शन कर रही हैं। इसकी तुलना मूक क्रांति से की जा रही है। भिवंडी पूर्व के विधायक रईस शेख ने कहा कि हाल ही में हमने सैकड़ों छात्रों को सम्मानित किया, जिन्होंने एसएससी परीक्षा उत्तीर्ण की है। एसएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने में सबसे आगे लड़कियां है। 70% लड़कियों ने एसएससी की परीक्षा पास की है। जिस तरह से लड़कियां नीट परीक्षा में पास हुई हैं यह मूक क्रांति है।
बता दें कि उर्दू माध्यम में पढ़ाई करते हुए सोमैया अंसारी ने साल 2008 में एसएससी एग्जाम में अपने स्कूल में टॉप किया और साल 2011 में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट हासिल की। सोमैया अंसारी के साथ अंसारी शिफा शमीम और मोमिन असीरा अख्तर ने भी नीट का एग्जाम पास किया। भिवंडी निवासी और कानून शिक्षक सलीम यूसुफ शेख ने बताया कि इन 3 लड़कियों ने कई युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा का सोत्र बनी है। इन तीनों के बाद अब कई बच्चियां यहां डॉक्टर बनने के सपने के साथ तैयारी में लग गई हैं।
कैब ड्राइवर की बेटी भी बनी एमबीबीएस: बता दें कि भिवंडी के शेख परवेज अहमद एक फोटोग्राफर और कैबी हैं। वह भिवंडी के स्टूडेंट्स को मुलुंड के एक कोचिंग सेंटर में ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब मैं इन एमबीबीएस उम्मीदवारों को कोचिंग सेंटर लाता ले जाता था तो मैंने अपनी बेटी के बारे में भी सोचा। इसके बाद मैंने इनमें से कुछ लड़कियों के पेरेंट्स से बातचीत की जिन्होंने मुझे गाइड किया और मैंने अपनी बेटी को उसी कोचिंग सेंटर में एडमिशन कराया। अब वह भी एमबीबीएस है।
Published on:
21 Aug 2022 07:25 pm
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